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Aligarh News: किस करवट बैठेगी भाजपा में हुई रार, बेकरारी से सभी को इंतजार

Sun, 16 Apr 2023 12:08 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

भाजपा जिला कार्यालय पर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में विवाद के बाद सांसद सतीश गौतम अपने खेमे के महानगर कमेटी के पदाधिकारियों व अन्य लोगों संग चले आए थे।
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भाजपा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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निकाय चुनाव से ऐन पहले भारतीय जनता पार्टी में प्रत्याशी चयन को लेकर शुरू हुई रार किस करवट जाकर थमेगी? इस पर अब सभी चुप्पी साधे हुए हैं। मगर अंदरखाने खेमेबंदी का दौर जारी है। शुक्रवार को हुई स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में जिले की चार व महानगर की दो निकायों का पैनल नहीं बन सका है।

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मगर संकेत हैं कि प्रदेश के किसी बड़े पदाधिकारी की मौजूदगी में अब रविवार को फिर बैठक हो सकती है। जिसमें महानगर की दोनों निकायों के पैनल तय होंगे। चूंकि शनिवार को प्रदेश स्तर पर पहले चरण की घोषणा के लिए बैठक जारी थी। इसलिए देर रात तक प्रदेश नेतृत्व के निर्देश का भी स्थानीय स्तर पर इंतजार होता रहा।

बता दें कि शुक्रवार को भाजपा जिला कार्यालय पर स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में विवाद के बाद सांसद सतीश गौतम अपने खेमे के महानगर कमेटी के पदाधिकारियों व अन्य लोगों संग चले आए थे। जानकारी मिली है कि वहां गभाना, बरौली व हरदुआगंज नगर पंचायत पर विरोध की शुरुआत हुई। विधायक होने के नाते जयवीर सिंह ने तीनों पंचायतों पर अपने नाम रखे, जबकि सांसद ने गभाना पर पूर्व विधायक दलवीर सिंह की पुत्रवधु व बरौली और हरदुआगंज पर संगठन से जुड़े पुराने लोगों के नाम रखे। इसी बात पर विवाद शुरू हुआ। इसके बाद महानगर अध्यक्ष के पैनल में बैठने और महानगर के वार्डों पर असहमति ने विवाद बढ़ा दिया।
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अंदरखाने की खबर है कि महानगर के सोलह वार्डों पर सहमति बन गई थी। मगर विवाद के चलते काम जहां का तहां रोक दिया गया। हालांकि विवाद के बाद बरौली की चारों निकाय व महानगर की दोनों निकायों पर मंथन रोक दिया गया। सूत्र बताते हैं कि जिला कमेटी ने जिले की निकायों का जो पैनल बनाया है, उसे व बरौली की चारों निकायों पर बिना सहमति के जो भी नाम हैं, उसे ज्यों की त्यों क्षेत्र कार्यालय आगरा भेजा जाएगा। वहीं महानगर की बैठक नए सिरे से रविवार को होने के संकेत हैं। चूंकि शनिवार को प्रदेश स्तर पर पदाधिकारी पहले चरण की सूची जारी करने में व्यस्त रहे। इसलिए कोई निर्देश नहीं मिले हैं।

मगर संकेत हैं कि अब बैठक में कोई बड़ा पदाधिकारी भी शामिल हो सकता है। इधर, सांसद इस घटना के बाद दिल्ली चले गए हैं। अंदरखाने की खबर है कि उनका खेमा पूरा पैनल बिना सहमति के प्रदेश मुख्यालय भिजवाने या किसी बड़े पदाधिकारी की मौजूदगी में पैनल बनाने को प्रयासरत है। वहीं दूसरा खेमा अपने अनुसार खेमेबंदी में जुटा है और महानगर का पैनल बनवाकर भिजवाने का प्रयास है। इस विवाद में संघ की ओर से भी मामले का पटाक्षेप करने का प्रयास जारी है।

पिछली हार का कारण भी बना था विवाद
पिछले मेयर के चुनाव को भाजपा हारी थी। उस समय भी टिकट वितरण को लेकर अंदरखाने का विवाद बड़ा कारण बना था। मगर इस बार विवाद चुनाव से पहले ही उभरकर बाहर आ गया। अब इसका क्या परिणाम होगा, ये आने वाला समय बताएगा।

जिले का अधिकांश निकायों को पैनल बन गया है, जिसे क्षेत्र कार्यालय भेजा जाएगा। कुछ पर सहमति नहीं बनी थी, उसे भी पूरा कर लिया जाएगा। विवाद जैसी कोई बात नहीं हुई। बस महानगर अध्यक्ष के पैनल में मौजूद न रहने को कहा गया। उसके बाद वे और उनके साथ कुछ लोग चले गए। अब नए सिरे से बैठक होगी। उसमें महानगर का पैनल बनेगा। महानगर अध्यक्ष के स्थान पर कौन बैठेगा, यह पार्टी तय करेगी।-श्रीचंद्र शर्मा, भाजपा जिला प्रभारी/एमएलसी
महानगर का पैनल शेष रह गया है। उसे एक दो दिन में बैठक कर बना लिया जाएगा। विवाद जैसी कोई बात नहीं है। प्रदेश में शनिवार को व्यस्तता के कारण समय तय नहीं हो पाया है।-राजेश चौधरी गुड्डू, सह प्रभारी निकाय चुनाव/विधायक मांट
महानगर की बैठक जल्द होगी। अभी उसको लेकर प्रदेश मुख्यालय पर व्यस्तता के कारण देर रात तक आदेश का इंतजार है। हो सकता है कि सुबह तक कोई निर्देश मिले। संगठन के निर्देश पर ही काम होगा। -विवेक सारस्वत, महानगर अध्यक्ष भाजपा


विवाद ने बढ़ाई दावेदारों की चिंता
इस विवाद ने भाजपा में दावेदारों की चिंता बढ़ा दी है। इसके पीछे की वजह है कि हर दावेदार किसी न किसी खेमे से जुड़ा हुआ है। ऐसे में यह उसकी चिंता का विषय है कि फलां खेमे से होने के चलते कहीं उसे विवाद का नुकसान न हो जाए। इसलिए सभी दावेदार बस अपनी अपनी स्थिति की टोह लेने में लगे हैं। बाकी कोई भी कुछ बोलने से कतरा रहा है।

ये हैं विवाद की मुख्य वजह

  • गभाना, बरौली व हरदुआगंज पर सांसद व क्षेत्रीय विधायक टिकट के दावेदारों पर सहमत नहीं
  • मडराक चेयरमैन पद पर बाहरी व स्थानीय प्रत्याशी को लेकर विरोधाभास लगातार बना हुआ है
  • नगर निगम के वो 23 वार्ड जो सीमा विस्तार के बाद महानगर में आए, उन पर विवाद
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