गरमी से पहले शहर की बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे विद्युत अधिकारियों द्वारा किए गए थे। जिसमें कई दर्जन ट्रांसफार्मरों का लोड बढ़ाने और कई बिजलीघरों के लोड बढ़ाने की बात कही गई थी। मगर गरमी की शुरुआत के साथ जब ओवरलोडिंग का ये आलम है तो आगे क्या होगा।
स्वर्णजयंती नगर शहर का सबसे ओवरलोड सब स्टेशन
स्वर्ण जयंती नगर बिजलीघर की बात करें तो यह शहर का सबसे ज्यादा ओवरलोड बिजलीघर है। जब यह बना था, तब की आबादी और अब की आबादी में कई गुना बदलाव हुआ है। पिछले एक वर्ष से इस बिजलीघर की ओरवलोडिंग को देखते हुए नए बिजलीघर का प्रस्ताव लंबित पड़ा है। मगर जमीन न मिलने के कारण नया बिजलीघर नहीं बन पा रहा। अगर इस दिशा में गंभीरता से ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में और समस्या होगी।
स्टाफ व संसाधनों का रोना सबसे ज्यादा
हाल ही में पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने प्रदेश भर में बिजलीघरों पर स्टाफ घटाया है। जहां पहले सब स्टेशन के एक एक फीडर पर चार-एक का स्टाफ था। अब सिर्फ सभी सब स्टेशनों पर तीन टीमें तैनात कर दी हैं। ऐसे में एक बिजलीघर पर आने वाली 25 से 30 शिकायतों के निस्तारण में स्टाफ के हाथ पांव फूलते हैं। वहीं संसाधनों की बात करें तो 4600 लीटर ऑयल ट्रांसफार्मरों में डालने के लिए गरमी में मांगा जाता है, जिसके बदले मात्र 400 लीटर ऑयल मिला है। ओवरलोडिंग खत्म करने को पांच एमवीए का एक नया ट्रांसफार्मर इस सब स्टेशन पर लगा है। मगर अभी तक वह स्थापित नहीं हो पाया है।
स्टाफ की कमी के कारण कुछ समस्या पैदा हो रही है। स्वर्ण जयंती नगर में रात जो ट्रांसफार्मर फुंका है, उसके बदले में नया ट्रांसफार्मर मिलने में देरी हुई। चूंकि स्टोर पर पहले से लंबी लाइन लगी थी। ट्रांसफार्मर लगभग चार बजे मिला और अगले दो घंटे में आपूर्ति शुरू कर दी गई। हमारे पास इस इलाके में दो ट्राली ट्रांसफार्मर हैं, मगर वह पहले से व्यस्त थीं। -राहुल बाबू कटियार, अधिशासी अभियंता