अलीगढ़। स्मृति ईरानी के व्यवहार को लेकर लंबे समय से जारी विवाद के बीच गुरुवार को वीसी ले जनरल जमीरउद्दीन शाह (रिटायर्ड) ने चुप्पी तोड़ी। मानव संसाधन मंत्री श्रीमती ईरानी द्वारा कथित अपमान किए जाने के मसले पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि वह फौजी हैं। उनका अपमान करना बड़े दिल गुर्दे का काम है। उन्हाेंने कहा कि 40 वर्षों तक पंजाब एवं नॉर्थ ईस्ट इंडिया में देश विरोधी गतिविधियों के विरुद्ध जंग करने वाले तथा देश के विभिन्न भागों में हुए सांप्रदायिक दंगों पर काबू पाने वाले का अपमान करना बड़े दिल-गुर्दे का काम है। श्री शाह ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा अपमानित किए जाने एवं एएमयू सेंटरों को अवैध कहने की खबर सोशल मीडिया एवं मीडिया में आने के बाद पहली बार चुप्पी तोड़ी। उन्हाेंने एक बयान जारी कर कहा कि केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी से केंद्रीय मंत्री ने एएमयू के केरल के मल्लापुरम, पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद एवं बिहार के किशनगंज में खोले गए एएमयू के सेंटर को अवैध करार देते हुए उनके मंत्रालय द्वारा फंड नहीं दिए जाने की बात कही थी। सेंटरों के बारे में श्री शाह ने कहा कि इनकी स्थापना विश्वविद्यालय के नीतिगत फैसले लेने वाली संस्थाओं एवं केंद्रीय सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान करने के बाद की गई है। इन सेंटरों को यूनिवर्सिटी के विजीटर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त है। अपमान के संबंध में उनका कहना है कि 40 वर्ष पंजाब एवं नार्थ ईस्ट इंडिया में देश विरोधी गतिविधियों के विरुद्ध जंग करने वाले तथा देश के विभिन्न भागों में हुए सांप्रदायिक दंगों पर काबू पाने वाले का अपमान करना बड़े दिल गुर्दे का काम है। कुलपति ने सोशल मीडिया एवं मीडिया की भूमिका की आलोचना करते हुए कहा कि एएमयू को बदनाम करने के लिए पूरे प्रकरण को नए विवाद के रूप में प्रस्तुत किया गया। वह भी तब जब विश्वविद्यालय अपने अल्पसंख्यक स्वरूप को बचाने और विश्वविद्यालय को नंबर वन बनाने के प्रयासों में जुटा है। इस प्रकरण पर सफाई देते हुए कुलपति जनरल शाह ने कहा है कि केरल के मुख्यमंत्री ने उन्हें मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी से एएमयू सेंटरों से संबंधित वार्ता के लिए 8 जनवरी की सुबह 10 बजे आमंत्रित किया था। वे निर्धारित समय पर केंद्रीय मंत्री के कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें सूचित किया गया कि केंद्रीय मंत्री की तबियत ठीक नहीं। अब मीटिंग उनके निवास स्थान पर दिन के साढ़े ग्यारह बजे होगी। जब वे मंत्री के निवास पर पहुंचे तो मीटिंग शुरू हो चुकी थी, इसलिए उन्होंने मीटिंग में भाग नहीं लिया। इसके बाद केरल के मुख्यमंत्री ने उन्हें बताया कि केंद्रीय मंत्री इस बात पर अटल हैं कि एएमयू सेंटर अवैध हैं। इसके लिए फंड नहीं दिया जाएगा। कुलपति ने कहा कि यूनिवर्सिटी के एक पूर्व छात्र ने केंद्रीय मंत्री को यह बता कर भ्रमित किया है कि सेंटर अवैध है। वह जल्द ही प्रधानमंत्री से भेंट करेंगे। उन्हें भरोसा है कि वह विश्वविद्यालय से संबंधित सभी समस्याओं का निवारण करा सकेंगे।