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Aligarh News: आक्रामक हो रहे लावारिस कुत्ते, खूब लग रहे रेबीज टीके

Wed, 28 Sep 2022 12:52 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

जानकार बताते हैं कि बारिश के दिनों में कुत्ते द्वारा काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसका एक महत्वपूर्ण कारण है कि बारिश के मौसम में कुत्तों के हारमोन में बदलाव आते हैं। इसलिए इस मौसम में कुत्ते बहुत ज्यादा आक्रामक होते हैं।
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street dogs - फोटो : istock
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विस्तार
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जिले में लावारिस कुत्ते लगातार आक्रामक हो रहे हैं। इस बात की गवाही सरकारी अस्पतालों के आंकड़े दे रहे हैं। चाहे जिला अस्पताल हो या दीनदयाल अस्पताल दोनों जगहों पर हर दिन बड़ी संख्या में एंटी रेबीज टीके लग रहे हैं। अकेले जिला अस्पताल में एक माह में 5000 से अधिक टीके लगाए जाते हैं। इनमें अधिकांश कुत्ते द्वारा काटे जाने के मरीज होते हैं।

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जानकार बताते हैं कि बारिश के दिनों में कुत्ते द्वारा काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसका एक महत्वपूर्ण कारण है कि बारिश के मौसम में कुत्तों के हारमोन में बदलाव आते हैं। इसलिए इस मौसम में कुत्ते बहुत ज्यादा आक्रामक होते हैं। ऐेसे में कुत्ते के साथ छेड़छाड़ करने से वह लोगों को काटना व दौड़ाना शुरू कर देते हैं। हालांकि, इससे बचने के कुछ उपाय हैं. जैसे जो घरों में कुत्ते पालते हैं। उनका वैक्सीनेशन कराया जा सकता है। इससे अलावा, लावारिस कुत्तों से दूर रहकर खुद को बचाया जा सकता है।

एक महीने में 5000 टीके अकेले जिला अस्पताल में
मलखान सिंह जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. ईश्वर देवी बत्रा स्वीकारती हैं कि उनके अस्पताल में प्रतिदिन 100 से अधिक एंटी रेबीज के टीके लगते हैं। महीने का औसत 4500 से 5000 टीके तक पहुंचता है। बारिश के मौसम में संख्या कुछ अधिक हो जाती है। ठंड आते आते इसमें गिरावट दर्ज की जाएगी। इसी तरह दीनदयाल संयुक्त अस्पताल में 12 से 17 सितंबर तक 573 एंटी रेबीज के टीके लगे थे, जबकि 18 सितंबर से 24 सितंबर तक 374 टीके लगे हैं। सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी बताते हैं कि जिले में प्रत्येक सीएचसी में एंटी रेबीज टीके लगते हैं। इस मौसम में मांग अधिक रही है।

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इस तरह की जाती है डॉग बाइट की ग्रेडिंग
डॉक्टरों के मुताबिक, थोड़ा सा खरोंच पैर में होता है, उसे माइल्ड कैटेगरी में रखा जाता है। ऐसे में उन्हें एंटी रेबीज का इंजेक्शन दिया जाता है। अगर कुत्ते हाथ या छाती के ऊपर चेहरे पर एक से ज्यादा बार काटता है। ऐसे में उन्हें रेबीज हीमोग्लोबिन इंजेक्शन देने की आवश्यकता पड़ती है, जो कि हाई पावर इंजेक्शन होते हैं। रेबीज के दोनों इंजेक्शन इन दिनों अस्पतालों में उपलब्ध हैं।

कब लगवा सकते हैं टीका
0 दिन, 1 दिन, 7 दिन, 14 दिन, 28 दिन।

कुत्ते के काटने के बाद टीका लगवाना जरूरी
जो कुत्ता पहले से चार पांच लोगों को काट चुका हो या लोगों को लगातार काट रहा हो तो यह बताता है कि कुत्ते में रेबीज के लक्षण हैं। इसको नजरअंदाज बिल्कुल नहीं करना चाहिए और तत्काल अस्पताल जाकर इंजेक्शन लगवाना चाहिए। क्योंकि एक बार रेबिज हो गया तो उसका इलाज मुश्किल हो जाता है। यह 100 फीसदी जानलेवा बीमारी है। इसलिए टीकाकरण कुत्ता काटने के बाद कराना बहुत ही आवश्यक है।
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