एएमयू के वीमेंस कॉलेज के हिंदी सेक्शन व ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क्स (ज्ञान) के पांच दिवसीय पाठ्यक्रम संपन्न हुआ । जिसमें मिशिगन यूनिवर्सिटी से आईं विशेषज्ञ प्रेमलता वैश्नवा ने कहा कि अनुवाद की जरूरत हर देश में है। विभिन्न देशों की विविधरूपी संस्कृति और परंपरा को समझने के लिए हमें अनुवाद की बहुत अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हाल ही में बुकर पुरस्कार से सम्मानित भारतीय लेखिका गीतांजलि श्री इसका जीता जागता उदाहरण हैं। उनका उपन्यास रेत की समाधि नाम से भारत में प्रसिद्ध था, लेकिन अमेरिकी अनुवादक डेसी रॉकवेल ने इस उपन्यास को अंग्रेजी में टॉम्ब ऑफ सैंड नाम से अनुवादित किया, जो कि विश्वभर में चर्चित हुआ। वैश्विक स्तर पर इस उपन्यास को प्रसिद्धि दिलाने में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
अंग्रेजी विभाग के प्रो. राशिद निहाल ने कहा कि अनुवाद करते समय एक समान अर्थ वाले शब्द हमेशा कई तरह के भ्रम पैदा करते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर पीसी टंडन ने बताया कि मशीनी अनुवाद ने समाज में जगह बनाई है। स्कूल ऑफ ट्रांसलेशन स्टडीज एंड ट्रेनिंग इग्नू से आई डॉ. ज्योति चावला ने कहा कि ऑडियो विजुअल इंडस्ट्री में अनुवाद रोजगार का साधान बनता जा रहा है। स्थानीय समन्वयक प्रो. एमजे वारसी ने कहा कि इस प्रकार के कोर्स एकेडेमिक स्तर पर महत्वपूर्ण हैं जो हर नौकरी में लाभदायक हैं। पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. नाजिश बेगम ने कहा कि प्रतिभागियों को अनुवाद के दौरान आने वाली समस्याओं से अवगत कराया और रोजगार के बारे में जानकारी दी गई। संचालन डॉ. शगुफ्ता नियाज ने किया।