उत्तर प्रदेश सरकार ने साहूकारी अधिनियम हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में साहूकारी के 263 लाइसेंस हैं, मगर तीन साल से इनका नवीनीकरण नहीं हुआ और न नया जारी हुआ है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं है कि जिले में साहूकार बिना किसी वैध लाइसेंस के गरीबों की मेहनत की कमाई मोटी ब्याज लेकर ऐंठने में लगे हैं।
सरकारी दस्तावेजों में जिले में 263 साहूकार पंजीकृत हैं, लेकिन वह भी पिछले तीन वर्ष से अपना लाइसेंस नवीनीकरण नहीं कराए। इसके बावजूद हजारों लोग बगैर लाइसेंस के ही इस वर्षों पुरानी साहूकारी व्यवस्था को चला रहे हैं। इन साहूकारों का निशाना महानगर के गांधी पार्क, सासनीगेट, देहलीगेट, रेलवे रोड इलाके में रहने वाले रेलवे, नगर निगम एवं अन्य सरकारी विभागों के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी रहते आए हैं। समय-समय पर झगड़े या उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या तक करने की घटनाएं सामने आती रहीं।
एक ही परिवार के तीन लोगों की
मौत भी साहूकारी का परिणाम थी
अलीगढ़। पूर्व में साहूकार की ब्याज चुकाते चुकाते जिंदगी से निराश नौरंगाबाद की तीन पीपल वाली गली के एक परिवार ने तीन सदस्यों की जान चली गई थी। पूरा परिवार खुदकुशी करने गंगा घाट गया था। वाकया वर्ष 2013 का है। मूल रूप से सुनपहर छर्रा के धर्मेंद्र अपनी पत्नी, बेटा व तीन बेटियों संग रहते थे। वे साहूकार के उत्पीड़न से आजिज थे, पूरा कर्ज ब्याज सहित चुकता करने के बाद भी ज्यों का त्यों था। उनके साथ मारपीट हुई तो उन्होंने परिवार सहित जान देने का निर्णय लिया। इस दुर्घटना में धर्मेंद्र व उनकी दो बेटियों की मौत हो गई, जबकि अन्य सदस्यों को गोताखोरों ने बचा लिया था। अब बेटा परिवार का जिम्मा संभाल रहा है।
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- जनपद में साहूकारी का न तो नवीनीकरण हुआ और न ही नया बना। बाकी अवैध रूप से इस तरह की साहूकारी पर आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई की जाती है। पुलिस स्तर से भी इन शिकायतों पर संज्ञान लिया जाता है।
- अमित कुमार भट्ट, एडीएम वित्त