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राजा महेंद्र प्रताप विवि निर्माण : तीन माह तक थमा रहा काम एक सितंबर के बाद फिर शुरू हुआ

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राजा महेन्द्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय का निरीक्षण करते प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा सुधीर म? - फोटो : CITY OFFICE
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अभिषेक शर्मा
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प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय का निर्माण तय नक्शे पर ही होगा। उसमें किसी तरह का कोई बदलाव या उसके प्लेटफार्म को उठाने जैसी कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी। मुख्यमंत्री से निर्देश मिलने के बाद तीन माह से बंद पड़ा विश्वविद्यालय परिसर का निर्माण एक सितंबर के बाद से शुरू करा दिया गया है। इसमें बारिश के दिनों में जलभराव के निदान के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए 15 वेल (जलस्रोत) बनाए जाएंगे। अत्यधिक जलभराव की स्थिति में एक वैकल्पिक पंपिंग सिस्टम भी लगेगा, जो बगल से गुजर रहे माइनर में पानी निकालेगा।
राजा महेंद्र प्रताप विश्वविद्यालय की आधारशिला पिछले वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे थे। मई में बारिश के बाद यहां जलभराव की समस्या को देखते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया गया था। अधिकारियों के स्तर से यह पाया गया कि इसका प्लेटफार्म सड़क से नीचा है। निर्माण के बाद बारिश में जलभराव की समस्या होगी। जिसको लेकर अधिकारियों ने दौरा किया और मुख्यमंत्री तक प्लेटफार्म उठाने संबंधी पत्रावली भेजी गई। इस दौरान मंडलायुक्त ने इंजीनियरों संग दौरा किया और वहां जलभराव के निदान को लेकर नए सिरे से मंथन हुआ। जिस पर तय हुआ कि इस परिसर में अगर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के ज्यादा स्रोत विकसित किए जाएं तो जलभराव नहीं होगा। इस तथ्य को खुद एक सप्ताह पहले मंडलायुक्त ने मुख्यमंत्री के समक्ष वार्ता में रखा। जिसमें मुख्यमंत्री की ओर से निर्देश मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। अब निर्माण पुराने नक्शे के अनुसार ही हो रहा है।
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नागर-फसाड शैली पर होगी इमारत
एक दूसरे से जुड़े होंगे पुस्तकायल-प्रशासनिक भवन
निर्णय लिया है कि विश्वविद्यालय की इमारत का फ्रंट और द्वार नागर शैली पर बन रहा है। उसे भव्य बनाने के लिए फ्रंट को फसाड तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। पुस्तकालय और प्रशासनिक भवन एक दूसरे से जुड़े रहेंगे। परिसर में कुल 15 वेल जलभराव वाला पानी जमीन में सींचने को बनेंगे। परिसर की सभी नालियां इन वेलों से जोड़ी जाएंगी, ताकि जलभराव के समय में एक साथ पानी जमीन में जा सके। इस सिस्टम को विकसित करने के लिए 12 करोड़ का रिवाइज प्रोजेक्ट जीएसटी सहित शासन को भेज दिया गया है।
-यह सही है कि बारिश में जलभराव के अंदेशे को लेकर काम रुका था। पिछले दिनों हमारे स्तर से इस पर अभियंताओं संग मंथन के बाद मुख्यमंत्री के समक्ष विषय रखा गया। उन्होंने निर्देश दिया कि विकल्प के अनुसार काम किया जाए। इसी क्रम में निर्माण शुरू करा दिया गया है। भव्य नागर शैली व फसाड तकनीक से भव्य बने। इसका ध्यान रखा जा रहा है।-गौरव दयाल, मंडलायुक्त
दो शिफ्ट में हो काम, समयावधि में काम करने का दें प्रमाण पत्र: प्रमुख सचिव
प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एसएम बोबड़े ने बुधवार को विवि परिसर के निरीक्षण के दौरान कहा कि अब यहां दो शिफ्टों में काम कराया जाए। जिससे कि निर्धारित लक्ष्य 2023 तक प्रथम चरण का काम पूरा हो सके। इस काम को पूरा करने का प्रमाण पत्र भी दें। जिससे कि दूसरी किश्त जारी कराई जा सके। निर्माण के दौरान गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए । समय से काम पूरा कराने के लिए दिन में 230 व रात में 90 मजदूर लगाए गए हैं।
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उन्होंने कहा कि जो भी विलंब हुआ। उसे अब दो शिफ्ट में काम जारी कर पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि अब वे समय समय पर यहां आकर गुणवत्ता देखते रहेंगे। साथ में यहां कुलपति से स्टाफ तैनाती आदि पर चर्चा की। इस दौरान कुलपति डॉ.चंद्रशेखर के अलावा रजिस्ट्रार, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी रेखा तिवारी, जिला अधिकारी इंद्र विक्त्रस्म सिंह, ई एमएच सिद्दीकी आदि उपस्थित रहे।
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