फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Aligarh News: इंतजार खत्म, जमीरउल्लाह 17 वर्ष बाद फिर सपा से मेयर के दावेदार

Sun, 16 Apr 2023 12:42 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

2007 के चुनाव में जमीर शहर सीट से विधायक बने और 2012 में कोल सीट से विधायक बने। 2017 का दौर आते आते पार्टी में हुए विघटन के चलते उन पर शिवपाल यादव खेमे की मोहर लगी होने के कारण टिकट नहीं मिला।
विज्ञापन
पूर्व विधायक हाजी जमीर उल्लाह खान - फोटो : facevbook
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

समाजवादी पार्टी से दो बार के पूर्व विधायक जमीरउल्लाह एक बार फिर 17 बरस बाद मेयर के चुनाव मैदान में भाग्य आजमाने जा रहे हैं। सपा ने इस पद के लिए 2006 के बाद अब फिर से उन्हें अपना दावेदार घोषित किया है। अमर उजाला ने तीन दिन पहले ही उनके दावेदार बनने के संकेत दे दिए थे। शनिवार दोपहर उन्हें प्रदेश कार्यालय से फोन भी आया था। मगर संकेत थे कि रविवार तक टिकट घोषित होगी। वे अपने प्रपत्र तैयार करा रहे थे कि शाम होते होते पार्टी हाईकमान ने उनके प्रत्याशी बनने की घोषणा कर दी।

विज्ञापन


खुद सपा शासन काल में अलीगढ़ को नगर निगम का दर्जा दिए जाने के बाद भी यह अब तक का इतिहास रहा है कि सपा मेयर पद नहीं जीत पाई। 2006 के चुनाव में सपा ने तत्कालीन सपा महानगर अध्यक्ष जमीरउल्लाह को प्रत्याशी बनाया था। शहर में सांप्रदायिक घटना हो चुकी थी। उस चुनाव में जमीर ने भाजपा को कड़ी चुनौती थी। मगर भाजपा के आशुतोष वार्ष्णेय के सामने चुनाव हार गए।

इसके बाद 2007 के चुनाव में जमीर शहर सीट से विधायक बने और 2012 में कोल सीट से विधायक बने। 2017 का दौर आते आते पार्टी में हुए विघटन के चलते उन पर शिवपाल यादव खेमे की मोहर लगी होने के कारण टिकट नहीं मिला। उन्होंने कोल से निर्दल नामांकन किया। इसके बाद वे कुछ समय के लिए बसपा में शामिल हुए और मेयर चुनाव में मो.फुरकान के साथ खड़े होकर उन्हें चुनाव लड़ाया।
विज्ञापन


बाद में कांग्रेस में भी गए, लेकिन फिर वापस सपा में आ गए। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने कोल से दावा ठोका था। मगर टिकट न पा सके। बता दें कि जमीरउल्लाह की राजनीतिक शुरुआत सपा से ही है। शुरुआत में वे उस समय के कद्दावर नेता ख्वाजा हलीम के सहयोग से युवजन सभा में राष्ट्रीय कार्य समिति तक गए। फिर महानगर अध्यक्ष बने। उनको टिकट की घोषणा पर समर्थकों ने खुशी जाहिर की है और देर शाम तक बधाई देने का सिलसिला जारी रहा।

शहर में गहरी पैंठ का मिला इनाम
अब सपा हाईकमान ने जमीरउल्लाह की शहर में गहरी पकड़ को ध्यान में रखकर उन्हें टिकट दिया है। 2006 में उनके मेयर चुनाव के परिणाम और 2017 में उनके द्वारा बसपा के मंच से मो.फुरकान को सौ फीसद मेयर जिताने के ऐलान को ध्यान में रखते हुए इस बार यह जिम्मा दिया है।

पार्टी ने मुझे मेयर पद का प्रत्याशी बनाकर जो जिम्मेदारी सौंपी है। उसे बखूबी निभाऊंगा। जनता के बीच रहकर हमेशा सेवा की है और अब जनता के सहारे ही चुनाव जीतने के लिए मैदान में उतरा हूं। हर कीमत पर चुनाव जीतकर दिखाऊंगा। मेरा शहर के लिए अपना एजेंडा है। जिसमें शहर में सफाई, विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे ज्वलंत मुद्दों पर काम करना है। रहा सवाल सत्ताधारी भाजपा से जूझने का तो इसके लिए मुझे जनता के अलावा किसी के पास जाने की जरूरत नहीं है। -जमीरउल्लाह, मेयर प्रत्याशी

विज्ञापन

2006 का परिणाम
2.40 लाख मतदाताओं ने किया था मतदान
32.46 फीसदी मत पाकर भाजपा के आशुतोष ने जीत दर्ज की थी
23.97 फीसदी मत पाकर सपा के जमीरउल्लाह रहे दूसरे स्थान पर
22.80 फीसद मत पाकर कांग्रेस के सुशील चौधरी तीसरे स्थान पर

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें