अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में लोकतंत्र बहाली की आवाज शिक्षकों ने उठाई है। उन्होंने कुलपति पैनल के लिए ईसी और कोर्ट सदस्य के चुनाव को जरूरी बताया। पूर्व कुलपति पर चुनाव न कराने का आरोप लगाया।
बुधवार को एएमयू के स्टाफ क्लब में डॉ. ओबैद अहमद सिद्दीकी, डॉ. जमील अहमद, डॉ. इशाद मोहम्मद खान, डॉ. अरशद बारी, डॉ. मोहम्मद शारिक, डॉ. अशरफ मतीन, डॉ. मुराद खान, डॉ. साद बिन जावेद ने कहा कि अब जब इदारे में नया निजाम आ गया, तो कुलपति का पैनल बनने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए। यह प्रक्रिया दिसंबर से शुरू होनी थी, लेकिन पूर्व कुलपति ने ऐसा करने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि एग्जीक्यूटिव काउंसिल व कोर्ट की खाली सीटों पर चुनाव कराना होना चाहिए। शिक्षकों ने कहा कि छह वर्षों से लोकतंत्र की हत्या हो रही थी। अब नए निजाम से उम्मीद है कि वह लोकतंत्र को बहाल करना है। शिक्षकों ने कहा कि लंबित मांगों को लेकर ईद के बाद धरना प्रदर्शन करेंगे।
मेंबर इंचार्ज प्रो. शाफे ने दिया इस्तीफा
अलीगढ़। एएमयू के जनसंपर्क कार्यालय के मेंबर इंचार्ज प्रो. शाफे किदवई ने खराब स्वास्थ्य के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह वह जनसंचार विभाग में सेवारत रहेंगे। प्रो. किदवई पिछले कई दिन से बीमार हैं। उनका दिल्ली में इलाज चल रहा है। चिकित्सक ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी। इसी आधार पर प्रो. किदवई ने अपने पद से इस्तीफा दिया है।
कुलपति के ओएसडी बोले- नहीं दिया इस्तीफा
अलीगढ़। एएमयू के कुलपति रह चुके प्रो. तारिक मंसूर के ओएसडी प्रो. अब्दुल सलाम ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है। अलबत्ता, इस्तीफा देने की पेशकश की थी। प्रो. अब्दुस सलाम के इस्तीफे की अफवाह उड़ी थी। उन्होंने कुलपति के हटने के बाद ओएसडी पद से इस्तीफा दे दिया है। इस संबंध में जब प्रो. अब्दुस सलाम से बात की, तो उन्होंने कहा कि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने ओएसडी बनाया था, जब उन्होंने इस्तीफा दे दिया, तब उन्हें अपने पद पर बने रहने का हक नहीं बन रहा था। इसलिए इस्तीफा देने चाहा तो पुराने रिश्ता हवाला देकर कार्यवाहक कुलपति ने इस्तीफा न देने का बात कही, जिसे सहर्ष स्वीकार कर लिया।