गभाना क्षेत्र में रविवार रात जवां के सजायाफ्ता हिस्ट्रीशीटर सुनील उर्फ भोलू ठाकुर की हत्या का मुख्य आरोपी होटल संचालक पंकज बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया। वह न्यायालय में समर्पण करने दीवानी परिसर पहुंचा था। थाने में पुलिस उससे देर रात तक पूछताछ करती रही। पूछताछ में उसने अन्य आरोपियों के नाम उजागर कर दिए हैं। इन सभी को पंकज ने आनन-फानन बुलाया था। अब पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की तलाश में जुट गई हैं।
रविवार रात जवां के भोजपुर गढि़या के सुनील उर्फ भोलू ठाकुर की उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वह अपने दोस्त के सेंट्रल जेल कैफे के उद्घाटन में शामिल होकर लौट रहा था। देर रात वापसी के समय हुए झगड़े के बाद उसी परिसर में होटल संचालक पंकज व चंद्रवीर निवासी ग्वालरा गभाना व अन्य साथियों पर पीछा कर कन्होई कट के पास गोली मारकर हत्या का आरोप लगा। उसी रात चंद्रवीर को गिरफ्तार कर लिया गया था। नामजद पंकज को पुलिस तलाश रही थी।
हालांकि उसकी लोकेशन इगलास, मथुरा आदि जगहों पर मिली। मगर उसकी ओर से अधिवक्ता ने न्यायालय में समर्पण अर्जी दायर कर दी थी, जिस पर बुधवार की तारीख नियत थी। पुलिस को उम्मीद कम थी कि वह इतनी घेराबंदी के बीच समर्पण करने आएगा। वह दोपहर में दीवानी पहुंच गया। इसी बीच पुलिस को खबर लग गई और उसे दबोच लिया गया। इस दौरान पुलिस समर्पण करा रहे अधिवक्ता को गिरफ्तारी के लिए मनाने में मुश्किल हुई। इस दौरान अन्य अधिवक्ताओं का सहयोग लेना पड़ा। करीब आधा घंटे के प्रयास के बाद पुलिस उसे यहां से पकड़कर ले जाने में सफल हुई।
पूछताछ में पंकज ने अपने अन्य साथियों के नाम उजागर किए हैं। वे सभी लोधा व आसपास क्षेत्र के बताए जा रहे हैं। घटना के कारणों व अन्य पहलुओं को पुलिस देर रात पूछताछ में उजागर करने में लगी थी। साथ ही गिरफ्तारी टीमों ने अन्य आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। इधर, पुलिस पूछताछ में यह सवाल जरूर जुड़ा हुआ है कि कहीं इसके पीछे कोई और तो नहीं। मगर अभी तक उजागर हुआ है कि पंकज अगर उसे न मारता तो आने वाले समय में भोलू उसे दिक्कत दे सकता था। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि उसे पूछताछ के बाद बृहस्पतिवार सुबह जेल भेजा जाएगा।
रविवार रात हत्या, सोमवार को दी समर्पण अर्जी
पुलिस पंकज की तलाश में घटना के बाद से लगी थी। पंकज के अधिवक्ता ने सोमवार को ही अर्जी दायर कर दी थी। मंगलवार को पुलिस से रिपोर्ट तलब की गई और बुधवार की तारीख नियत की गई तो पुलिस को लगा कि इतनी जल्दी समर्पण संभव नहीं है। वह पुलिस के डर से काफी दूर निकल गया होगा। मगर वह जिले में आसपास ही छिपा रहा और बुधवार को समर्पण करने पहुंच गया। दूसरे खेमे के लोग भी नजर रखे थे। जैसे ही पंकज के आने की खबर लगी और तत्काल पुलिस पहुंच गई।