प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में किस कदर फर्जीवाड़ा हुआ है उसका खुलासा सोशल ऑडिट में सामने आया है। जिसमें अपात्रों को लाभ दे दिया जो न केवल भूमिहीन थे, बल्कि दूसरी तहसीलों के रहने वाले भी थे। इतना ही नहीं अविवाहित पुत्रियों समेत अपात्रों को लाभ दिलाने की खातिर फर्जी तरीके से उनका पंजीकरण दूसरी तहसीलों से कराया गया है। यह खुलासा हुआ तो विभाग में हड़कंप मच गया । अब ऐसे लोगों को नोटिस भेजकर खातों में भेजी गई सम्मान निधि की धनराशि वापसी की तैयारी है। केंद्र सरकार किसानों के खातों में ऑनलाइन प्रधानमंत्री सम्मान निधि भेज रही है। फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान पर आर्थिक मदद दिए जाने की व्यवस्था की गई है। बाढ़, आंधी, बारिश, तेज हवा से फसल को होने वाले नुकसान की भरपायी बीमा करने वाली कंपनी करती है।
भूमिहीन फिर भी मिल रही सम्मान निधि
तहसील गभाना के सौंगरा गांव की सुमन देवी पत्नी सुभाष चंद्र, गीता देवी पत्नी बॉबी, गायत्री देवी पत्नी राकेश, सोनिया देवी पत्नी जयप्रकाश, राधा पत्नी अरुण कुमार को अतरौली तहसील के धनसारी गांव का मूल निवासी बताते हुए सम्मान निधि का लाभ दिलाया है। इसी गांव की पिंकी देवी को अतरौली के शेरापुर, शोभा, इनायतपुर, शिव देवी धनसारी, नीलम, भूरी देवी को शेरापुर, निशा, विजय देवी को धनसारी गांव का मूल निवासी दर्शाया गया है। राजस्व टीम ने जांच की तो इस पूरे खेल का खुलासा हुआ है। खास बात यह है कि इनमें से किसी के नाम पर जमीन दर्ज नहीं है। भूमिहीन होने के बाद भी इन्हें सम्मान निधि का लाभ दिया गया है। पड़ताल में साफ हुआ है कि फर्जीवाड़े में गांव की एक महिला दलाल और विभागीय कर्मचारी की भूमिका सामने आयी है। सम्मान निधि में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े की यह तो केवल बानगी भर है। पूरे जिले में कृषि एवं राजस्व विभाग की टीमें सोशल ऑडिट कर रही हैं।
किसान सम्मान निधि में गड़बड़ी पर सभी पात्रों की नये सिरे से जांच करायी जा रही है। कृषि विभाग के साथ ही राजस्व विभाग की टीमों द्वारा सोशल ऑडिट किया जा रहा है। इसमें जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अपात्रों से धनराशि वापसी भी की जाएगी।
-यशराज सिंह, उपकृषि निदेशक