जिले में डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार का प्रकोप जारी है। घर-घर बुखार से पीड़ितों की चारपाई बिछी हैं। जिला स्तर पर सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन दो-दो हजार मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें आधे से ज्यादा बुखार से पीड़ित हैं। इसके बावजूद मच्छरजनित इन रोगों की रोकथाम के लिए जिम्मेदार विभागों की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। दावे तो बहुत हैं, लेकिन मच्छरों को मारने वाली फागिंग मशीनें कहीं नजर नहीं आ रहीं। कागजों पर फागिंग के लिए मशीनों पर डीजल व मिथाइल का खर्च बराबर दर्ज हो रहा है।
वैसे तो जुलाई में बारिश के बाद से ही डेंगू, वायरल व मलेरिया का असर दिखने लगता है। इसके लिए जिले में स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील क्षेत्र भी चिह्नित कर दिए, मगर सितंबर माह आते-आते वायरल व डेंगू ने असर दिखाना शुरू कर दिया था। अब तक जिले में डेंगू के 235 मरीज सामने आए हैं। वहीं उल्टी-दस्त पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। नगर निगम के दावों पर गौर करें तो 14 मशीनें शहर में फागिंग कर रही हैं। 13 मशीनों से शहर के आठ सर्किल में फागिंग हो रही है। एक मशीन वीआईपी मूवमेंट के लिए है। इस काम के लिए 30 कर्मचारियों की नियमित ड्यूटी लगी है। शिकायतों के आधार पर टीम फागिंग कर रही हैं। हालांकि शहर के अधिकतर इलाकों के निवासियों का कहना है कि उनके इलाके में मशीन नहीं पहुंच रही। शिकायतों के बाद भी तमाम क्षेत्रों में फागिंग नहीं हो रही है। नगर निगम के रिकार्ड के अनुसार एक मशीन को प्रतिदिन 15 लीटर डीजल, डेढ़ लीटर पेट्रोल व डेढ़ लीटर मिथाइल मिलता है।
वहीं मुख्यालय स्थित दोनों जिला अस्पतालों की ओपीडी में वायरल बुखार, खांसी, आंखों की बीमारी, चर्म रोग और टॉयफायड जैसी बीमारियों के मरीज पहुंच रहे हैं। मरीजों के शरीर में दर्द, सिर में दर्द व तिल्लियों में भी दर्द की शिकायतें आ रही हैं। लगभग पंद्रह दिन तक मरीज को नियमित दवाई लेनी होती है। दोनों अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की सर्वाधिक भीड़ है। अस्पतालों के दवा वितरण कक्षों में भी मरीजों की लाइन लग रही है। स्थिति यह है कि दवा वितरण कक्षों में दवा का भंडार तीन से चार दिन में ही समाप्त हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी
-संक्रमित मरीजों की निगरानी।
-संक्रमित क्षेत्र में घर-घर सर्वे की जिम्मेदारी ।
-संदिग्ध लोगों की जांच व उपचार की व्यवस्था ।
-रोगियों के लिए मुफ्त परिवहन सुविधा
-बीमारियों से बचाव के लिए प्रचार-प्रसार।
पंचायत राज विभाग
-ग्राम स्तर पर साफ-सफाई व फागिंग की जिम्मेदारी ।
-संचारी रोग से ग्रसित लोगों को स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से दवाएं दिलवाना।
नगर विकास विभाग
-संचारी रोग की रोकथाम व साफ-सफाई के लिए संवेदनशीलता।
-संक्रमित क्षेत्रों में जन जागरूकता अभियान की जिम्मेदारी।
-फागिंग व हाट स्पाट क्षेत्रों में एंटी लार्वा का छिड़काव ।
-नालियों को ढकने व कचरा के निस्तारण की व्यवस्था ।
-सड़कों के किनारे उगी झाड़ियों व गंदगी का निस्तारण ।
-डेंगू बुखार को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। प्रमुख अस्पतालों में डेंगू वार्ड बने हैं। हमारी टीमें लगातार क्षेत्रों में भ्रमण कर लार्वा निस्तारण व दवा छिड़काव आदि का काम कर रही हैं। लोगों से सलाह है कि अपने क्षेत्रों व घरों में सफाई आदि व पानी न भरने का विशेष ध्यान रखें। -डॉ. नीरज त्यागी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
डेंगू से बचने का यह तरीका
सभी को स्वयं ख्याल रखने के साथ ही अपने घर और बाहर की सफाई पर ध्यान देना होगा। लगातार बुखार होने पर जिला अस्पताल में एलाइजा टेस्ट कराने से इसकी पुष्टि हो जाएगी। खून में प्लेटलेट्स चेक कराते रहें। डेंगू में मुंह, नाक अथवा अन्य जगह से खून आना मरीज के लिए खतरनाक हो सकता है। बुखार आने पर तत्काल उपचार कराएं।
आज भी मिले जिले में डेंगू के आठ मरीज
अलीगढ़। जिले में बुधवार को भी डेंगू के आठ मरीज मिले हैं। इनमें एक देहात व 7 शहर में मिले हैं। डीएमओ डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ ने इसकी पुष्टि की है। इस तरह अब जिले में 235 मरीज मिल चुके हैं। साथ में मरीज मिलने वाले इलाकों व हॉट स्पॉट क्षेत्रों में बुधवार को भी टीमें सक्रिय रहीं।
जिले भर की सभी ग्राम पंचायतों में मच्छरों से बचाव के लिए अभियान चलाया जा रहा है। साफ-सफाई के साथ ही फागिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। जहां कीटनाशक दवाओं के छिड़काव के लिए फागिंग मशीनें उपलब्ध नहीं हैं वहां ग्राम पंचायत फंड से नई मशीनें खरीदने के निर्देश दिए गए हैं। - धनंजय जायसवाल, जिला पंचायत राज अधिकारी।
यह हैं ताजा आंकड़े-
-235 डेंगू मरीज
-33 मलेरिया मरीज
-11 चिकिनगुनिया मरीज
-00 स्वाइन फ्लू मरीज
चीफ इंजीनियर कार्यालय के सामने भरा गंदा पानी।- फोटो : CITY OFFICE