थाना सिविल लाइंस पुलिस व एसटीएफ फील्ड यूनिट मेरठ की संयुक्त कार्रवाई में पकड़े गए सभी 13 आरोपियों को बुधवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया। पुलिस मामले में नामजद व फरार डाक विभाग के अधिकारियों को तलाश रही है। इसके साथ ही पूर्व में डाक सहायकों की हुई भर्ती भी संदेह के दायरे में आ गई है।
एसटीएफ व सिविल लाइंस पुलिस ने ग्रामीण डाक सेवकों के पद पर फर्जी अंकतालिकाओं ( मार्कशीटों) के सहारे भर्ती कराने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया था। यह रैकेट डाक विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा था। एक आवेदक से पांच-पांच लाख रुपये नौकरी के नाम पर लिए गए थे। इसमें अमरोहा निवासी सरगना साजिद अली ने स्वीकारा कि वे ग्रामीण डाक सेवक पद पर चार से पांच लाख रुपये तक लेकर भर्ती कराते हैं।
इन्होंने स्वीकारा कि वे आवेदकों के फर्जी अंक पत्र सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ, राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय व बिहार शिक्षा बोर्ड पटना आदि के तैयार करते हैं और उनका ऑनलाइन डेटा भी फीड करते हैं। डाक विभाग के अधिकारी उन अंक पत्रों के सत्यापन में मदद करते हैं, जिसके बदले प्रत्येक अभ्यर्थी से एक लाख रुपया लेते हैं। बाकी रकम वे आपस में बांट लेते हैं। उन्होंने स्वीकारा कि वे भर्ती के इस फर्जीवाड़े में काफी समय से शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि भमोला पुल के नीचे कुछ अंकपत्रों के सत्यापन के लिए सिलसिले में एकत्रित हुए थे। पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ थाना सिविल लाइंस में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके साथ ही सीपीएम झांसी में तैनात डाक अधीक्षक देवेंद्र कुमार सिंह, मुख्य डाकघर अलीगढ़ के डाक अधीक्षक संजय सिंह व दीपक निवासी मढ़ी जॉनी मेरठ व सोनू निवासी बहजोई संभल के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है।
एसपी सिटी मृगांक शेखर पाठक ने बताया कि मामले में जांच जारी है। डाक विभाग के फरार अधिकारी व कर्मचारियों की तलाश में टीम जुटी हुई हैं। इस संबंध में मुख्य डाकघर अलीगढ़ के डाक अधीक्षक संजय सिंह ने बताया कि इस मामले में विभाग का कोई लेना-देना नहीं है। नियमानुसार भर्ती की प्रक्रिया अपनायी गई है। पुलिस ने बिना विवेचना ही उनका नाम मुकदमे में शामिल कर दिया है।