फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तेरे और मेरे...ये उदास उदास चेहरे

Sun, 19 Jul 2015 02:13 AM IST
अलीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
अलीगढ़। ‘हर्ष और उल्लास अस्थायी है जबकि उदासी सार्वभौम है’। इसी बात को ध्यान में रखते हुए गजलकार सुरेश कुमार जब कलम की जगह पेंटिंग ब्रश थामते हैं तो कैनवास पर पर संवेदनाओं की आकृति के रूप में गजल जन्म लेती है। सुरेश कुमार आजकल पेंटिंग के पुराने हुनर के माध्यम से उदास चेहरों के चित्रण में जुटे हैं। चित्रों की इस श्रंखला को उन्होंने ‘ये उदास उदास चेहरे नाम दिया है’। अब तक 100 से अधिक पेंटिंग बना चुके सुरेश कुमार जल्द ही इनकी प्रदर्शनी करने वाले हैं। ऑयल पेंट के साथ कैनवास पर सीधे रेखा चित्रों से मानवीय चेहरों की अलग अलग भाव भंगिमाओं के साथ उदासी का चित्रण किया है। सुरेश कुमार ने कभी हाइकू की रचनाओं के साथ अपने रेखा चित्रों का संग्रह प्रस्तुत किया था।   एक वक्त अलीगढ़ में त्रिलोचन शास्त्री छह माह का प्रवास कर रहे थे तब सुरेश कुमार ने उनके व्यक्तित्व को भी रेखाचित्र में समेटा था। एक रेखा चित्र आज भी एएमयू के हिंदी विभाग में लगा हुआ है। चित्रण के लिए उदासी ही विषय क्यों चुना? यह मानव के जीवन का एक सशक्त पहलू है। इसमें विस्तार की गुंजाइश बहुत ज्यादा है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें