यमुना एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहीत भूमि का हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप मुआवजा देने की और अन्य समस्याओं को लेकर टप्पल इंटरचेंज पर सोमवार को किसानों की महापंचायत हुई। इसमें 40 मिनट तक अधिकारियों व किसानों के बीच वार्ता हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया। अब इस मुद्दे पर 24 जुलाई को अलीगढ़ और 26 जुलाई को नोएडा में अधिकारियों के साथ वार्ता होगी।
किसानों का कहना है कि यमुना एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण में जो मुआवजा दिया गया था, उससे वे संतुष्ट नहीं थे और हाईकोर्ट चले गए थे। हाईकोर्ट ने अधिग्रहीत दर पर 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया था। किसानों की मुख्य मांग इसी मुआवजे का भुगतान करने की थी।
महापंचायत में शामिल हुए भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र की सरकार किसान विरोधी है और किसान खेती करने से बचने लगे हैं। अगर किसानों के लिए आंदोलन होते रहेंगे तो कुछ न कुछ लाभ मिलता रहेगा, नहीं तो सरकार से कुछ नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि देश भर में किसानों की अलग-अलग स्थान पर अलग-अलग समस्या है, यहां भूमि अधिग्रहण का मामला है।
आगरा में भी बिजली और जमीन अधिग्रहण का मुद्दा है। सरकार जमीन के सर्किल रेट नहीं बढ़ा रही है, जबकि अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन व भत्ते में बढ़ोतरी होती रहती है। यहां के किसानों का 64 प्रतिशत मुआवजा बाकी है। हमारी मांग है कि यमुना एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहीत जमीन का किसानों को नोएडा जितना सर्किल रेट और मुआवजा दिया जाए।
उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति नहीं होने से किसानों की धान की फसल सूख रही है। नियमित बिजली आपूर्ति दी जाए, जिससे किसान धान की फसल की रोपाई और सिंचाई कर सके। कार्यकर्ताओं द्वारा महापंचायत में की गई अव्यवस्था पर राकेश टिकैत ने नाराजगी भी जताई।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि किसान वर्तमान में बारिश न होने से परेशान है, ऊपर से बिजली विभाग भी परेशान कर रहा है। आखिर किसान कैसे खेती करें, बिना बिजली के सिचाई नहीं हो पा रही है, बंबों में भी पानी नहीं आ रहा है।
महापंचायत का संचालन कर रहे भाकियू जिलाध्यक्ष सुन्दर सिंह बालियान बताया कि प्रशासन व सत्ताधारी नेता उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। तीन बार घर की नाप कर चुके हैं व उसे तोड़ने की फिराक में है। हमारे पूरे परिवार ने भाकियू में रहकर किसानों की सेवा की है।
इस दौरान हुई वार्ता में एसपी देहात, एडीएम प्रशासन, खैर क्षेत्राधिकारी, खैर उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, यमुना एक्सप्रेस वे अथॉरिटी के ओएसडी शैलेन्द्र सिंह, उपजिलाधिकारी नोएडा आदि शामिल थे। 24 और 26 को पुनः होने वाली बैठक में समाधान नहीं निकलने पर भाकियू ने आंदोलन की चेतावनी दी है। महापंचायत के दौरान टप्पल थाना, खैर थाना, पिसावा थाना सहित अन्य थानो का भारी पुलिस बल, पीएसी बल मौजूद रहा।
सोमवार सुबह साढ़े दस बजे शुरू हुई महापंचायत में अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, हाथरस, आगरा आदि अन्य जिलों के भाकियू पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। अध्यक्षता राजवीर सिंह ने की। इसमें कमांडो ओपी सिंह मंडल अध्यक्ष, ओमपाल तालान, रामपाल शर्मा, धर्मवीर सिंह जिलाध्यक्ष मथुरा, सुभाष चौधरी, विमल तोमर प्रदेश उपाध्यक्ष, पवन खड़ाना, मलखान सिंह आदि ने भी संबोधित किया। बीच-बीच रागिनी का भी आयोजन किया गया।
प्रमुख मांग
-हाईकोर्ट के आदेशानुसार अधिग्रहीत भूमि का 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए।
-किसानों की जमीन का सर्किल रेट बढ़ाया जाए, उनपर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाए।
-रोस्टर के हिसाब से बिजली की आपूर्ति की जाए, विकसित टाउनशिप में दस प्रतिशत भूमि दी जाए।
-किसानों के पास जो जमीन है, उसे बंजर भूमि के तौर पर दर्ज न किया जाए।