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Aligarh News: उम्रकैद की सजा पा चुके पति को रिहा करने की सुनीता ने ठानी, आठ साल बाद मिला न्याय

Wed, 25 Jan 2023 07:00 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अभिषेक शर्मा

सार

बरला क्षेत्र के गांव दिलालपुर के श्यौराज को नाम के फेर में हरियाणा पुलिस उठा ले गई। अपहरण, हत्या व लूट जैसे संगीन अपराध में जिले के बहुचर्चित डॉक्टर देवेंद्र डेथ गिरोह के सदस्य के रूप में उम्रकैद की सजा भी हो गई। मगर श्यौराज की पत्नी ने जब ठाना तो उसने कानून का सहारा लेकर लड़ाई शुरू की और अपने पति को बाइज्जत बरी कराकर मानी।
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श्यौराज, निवासी दिलालपुर बरला - फोटो : अमर उजाला
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बात सुनने में फिल्मी कहानी से कम नहीं है, मगर सच है। बरला क्षेत्र के गांव दिलालपुर के श्यौराज को नाम के फेर में हरियाणा पुलिस उठा ले गई। अपहरण, हत्या व लूट जैसे संगीन अपराध में जिले के बहुचर्चित डॉक्टर देवेंद्र डेथ गिरोह के सदस्य के रूप में उम्रकैद की सजा भी हो गई। मगर श्यौराज की पत्नी ने जब ठाना तो उसने कानून का सहारा लेकर लड़ाई शुरू की और अपने पति को बाइज्जत बरी कराकर मानी। आठ वर्ष बाद श्यौराज की रिहाई हुई। आज श्यौराज गांव में परिवार के साथ हंसी-खुशी रह रहे हैं और तीन बच्चों की शादी तक कर दी है।

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गांव में पति के साथ परचून की दुकान चलाने वाली सुनीता के अनुसार, ये कहानी शुरू होती है वर्ष 2004 से। एक दिन हरियाणा के पलवल जनपद की पुलिस अचानक गांव में आई और उसके पति को उठाकर ले गई। चार बच्चों का पिता श्यौराज गांव में खेती बाड़ी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। बच्चे भी छोटे थे। पति को इस तरह पुलिस द्वारा पकड़ कर ले जाते देख मेरे हाथ पांव फूल गए। शुरुआत में तो कुछ समझ नहीं आया। बाद में जानकारी जुटाना शुरू किया तो सुनीता को सच का पता लग गया।

इस तरह जुड़ा कुख्यात डॉक्टर डेथ गिरोह से श्यौराज
पलवल पुलिस की कहानी के अनुसार, बरला क्षेत्र का कुख्यात अपराधी देवेंद्र जो डॉक्टर डेथ के नाम से जाना जाता है। उसकी हरियाणा में सक्रियता है। आपराधिक इतिहास के अनुसार, वह हरियाणा से टैक्सी भाड़े पर लेकर जाता है और चालकों की हत्या कर टैक्सी लूट लेता था। पलवल पुलिस ने देवेंद्र के सहयोगी के रूप में श्यौराज का नाम खोला। मगर सच ये था कि वह श्यौराज कोई और था। वह बरला क्षेत्र का रसूखदार व्यक्ति था। जब पलवल पुलिस उस रसूखदार श्यौराज को खोजती हुई उसके दरवाजे पर पहुंची तो उसने अपने आप को बचाते हुए धन बल के आधार पर सुनीता के पति श्यौराज को पलवल पुलिस के हवाले करा दिया। जिस अपराध में श्यौराज को पकड़ा गया, बाद में उसी अपराध में देवेंद्र व श्यौराज आदि को पलवल कोर्ट से उम्रकैद हो गई।

श्योराज की पत्नी सुनीता व बच्चे

 

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सुप्रीम कोर्ट तक ऐसे लड़ी मर्दानी

सुनीता बताती हैं कि 2008 में पति को उम्रकैद होने के बाद वह निराश हो गई थीं। कभी डीएम-एसएसपी तो कभी सांसद, विधायकों की देहरी पर तस्तक देती फिरती थी। 2010/11 में तत्कालीन एसएसपी सत्येंद्रवीर सिंह ने उसकी फरियाद को गंभीरता से सुना। उन्होंने तत्कालीन सीओ बरला से प्रकरण में जांच कराई। जांच में सच सामने आया तो एसएसपी ने पलवल एसएसपी को श्यौराज के समर्थन में अर्द्धशासी पत्र लिखा। साथ में सीओ की जांच रिपोर्ट भी भेजी। मगर एसएसपी पलवल ने अपने जवाब में बताया कि अब चूंकि उसे सजा हो चुकी है। इसलिए पुलिस कुछ नहीं कर सकती। इसके बाद उसी जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर सुनीता ने दिल्ली में एक एनजीओ की मदद से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका (पीआईएल) का संज्ञान लिया और चंद दिनों के प्रयास में वर्ष 2012 में उसे उस अपराध में बाइज्जत रिहाई मिली।

तीन बच्चों की हो चुकी है शादी
मंगलवार को पति श्यौराज किसी रिश्तेदारी में आयोजित सगाई कार्यक्रम में गए थे। घर में सुनीता अपने बेटे, बहू व अविवाहित बेटी संग मौजूद थीं। दो बड़ी बेटियों व बेटे की शादी हो चुकी है। एक बेटी की शादी होनी है। इस मामले में सुनीता ने मानवाधिकार आयोग की शरण लेकर मुआवजा मांगा था। मानवाधिकार आयोग ने जिले के अधिकारियों को पत्र भेजा है। अभी उस पर प्रतिक्रिया शेष है। वह चाहती हैं कि आठ वर्ष उसके पति के निर्दोष जेल रहने का मुआवजा मिले।

अमर उजाला का बार-बार जताती रहीं आभार
सुनीता कहती हैं कि उस समय के सांसद से लेकर मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति आदि से इंसाफ की गुहार लगाई। मगर मदद मिलने के बजाय दिन बीतते जा रहे थे। पति जेल में निर्दोष होने के बाद भी बंद थे। परिवार की आस टूट चुकी थी। तभी अमर उजाला अखबार से संपर्क किया। अखबार ने पति की बेगुनाही की खबरें प्रकाशित कीं। इसके बाद जिला प्रशासन जागा। मामले की पुन: जांच शुरू हुई। जांच में वे बेगुनाह साबित हुए और आठ साल बाद पति को 2012 में रिहाई मिली। साथ ही परिवार के माथे से कलंक हटा और परिवार को इंसाफ मिला। इसके लिए पूरा परिवार अमर उजाला का ऋणी है।
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