चंडौस थाने के वरिष्ठ उपनिरीक्षक नरेंद्र सिंह को एंटी करप्शन आगरा टीम ने 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। एक विद्यालय प्रबंधक को मुकदमे में राहत देने के नाम पर यह रिश्वत ली गई थी। मंगलवार दोपहर हुई इस गिरफ्तारी की खबर पर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। टीम दरोगा को लेकर गभाना थाने आ गई। जहां मुकदमा दर्ज कराया गया। इस मामले में दरोगा को निलंबित कर दिया गया है। जिसे बुधवार का अदालत में पेश किया जाएगा ।
चंडौस में टीचर्स कालोनी के कुलदीप तोमर महेंद्र सिंह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रबंध संचालक हैं। पिछले दिनों विद्यालय की प्रापर्टी से जुड़े विवाद में उनके व अन्य लोगों के खिलाफ थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया गया था। जिसकी विवेचना एसएसआई नरेंद्र सिंह द्वारा की जा रही थी। कुलदीप तोमर ने एंटी करप्शन सेल आगरा को लिखित शिकायत दी और बताया कि उन्हें विवेचना कर रहे दरोगा द्वारा आए दिन फोन किया जा रहा है, जिसमें मुकदमे में धाराएं घटाने के नाम पर 40 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। अगर रुपये नहीं दिए तो ऐसी चार्जशीट बनेगी कि हाईकोर्ट से भी जमानत न मिले। अन्यथा आपको व अन्य लोगों को मामूली धाराओं में ही धारा 41 के तहत थाने से जमानत दे दी जाएगी। इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए एंटी करप्शन आगरा टीम के इंस्पेक्टर कुशलवीर सिंह डीएम से मिले और उन्होंने दरोगा को ट्रैप करने की अनुमति मांगी। डीएम की अनुमति के आधार पर विकास भवन से दो स्वतंत्र एवं सरकारी गवाह लिए गए। विकास भवन में ही कुलदीप को बुलाकर समझाया गया और उन्हें केमिकल लगाकर 2-2 हजार के नोट के रूप में 40 हजार रुपये दिए गए। योजना के तहत दरोगा को में विद्यालय परिसर में फोन कर बुलाया गया। दरोगा ने प्रबंधक कक्ष में बैठकर कुलदीप से 40 हजार रुपये ले लिए। इसी बीच टीम पहुंच गई और दरोगा को रिश्वत के नोटों सहित रंगेहाथ पकड़ लिया। इनके खिलाफ एंटी करप्शन इंस्पेक्टर कुशलवीर सिंह की ओर से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत देर रात मुकदमा दर्ज कराया गया। सीओ गभाना मोहसिन खान ने मुकदमे की पुष्टि की है।
-जिस मुकदमे में दरोगा नरेंद्र द्वारा रिश्वत मांगी जा रही थी। उसमें कुछ दिन पहले ही चार्जशीट दायर हो चुकी है। अब दरोगा सिर्फ रुपये ऐंठने की नीयत से यह कर रहा था। यह 7 सात साल से कम सजा का मुकदमा है, जिसमें गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है। निलंबन संस्तुति भी कर दी गई है।-कुलदीप सिंह गुणावत, एसपी सिटी
लोधा में भी दर्ज है एक दरोगा पर भ्रष्टाचार का मुकदमा
इससे पहले भी पुलिस व अन्य विभागों के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के मुकदमे दर्ज हुए हैं। पिछले वर्ष लोधा थाने में दो दरोगाओं पर इसी तरह भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह मुकदमा वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव के दौरान प्रधान प्रत्याशी परिवार से रिश्वत लेने की शिकायत पर हुआ था। जिसकी जांच लंबे समय तक एंटी करप्शन ने दी। आरोप साबित होने पर तत्कालीन एसओ धर्मेंद्र व सहयोगी दरोगा पर मुकदमा दर्ज हुआ। इसी तरह 2010-11 में बिजली विभाग के एक अभियंता को टीम ने रंगेहाथ पकड़ा था, जिसका मुकदमा सिविल लाइंस में दर्ज हुआ था।