एसटीएफ से पूछताछ में उजागर हुआ कि अदालत द्वारा दोषी करार दिए जाने के दिन सोनू अलीगढ़ में ही था। इसके अगले दिन वह अलीगढ़ से बाहर गया। फिर वापस अलीगढ़ भी आया। मगर वह लगातार ठिकाने बदल रहा था। कभी अलीगढ़ व कभी दिल्ली-एनसीआर में रुकता था। गिरफ्तारी से पहले भी वह वहां से कहीं बाहर निकलने की तैयारी में था। इसी मकसद से गाड़ी खड़ी थी। मगर उसके निकलने से पहले पकड़ा गया। वह पूर्व विधायक मलखान सिंह के भाई मुकदमे में पैरवी करने वाले वादी दलवीर सिंह की हत्या की फिराक में था। इसी इरादे से वह अदालत में नियत तारीख से गैर हाजिर हुआ। उसे पता था कि अब सजा तो उसे भी होनी है। जेल जाने से पहले वह इस काम को कर देगा तो आगे की पैरवी रुक जाएगी।
भाई की हत्या का बदला भी इसी फरारी का हिस्सा
एसटीएफ से पूछताछ में सोनू ने स्वीकारा कि पूर्व विधायक की हत्या के बदले उसके भाई हनी गौतम की हत्या हुई थी। उसके मन में यह भी इरादा था कि वह पूर्व विधायक के भाई की हत्या कर अपने भाई की हत्या का बदला लेगा और पैरवी कमजोर करने का काम करेगा। इसी इरादे से वह फरार हुआ था।
10वीं तक शिक्षित सोनू बना गैंग लीडर
एसटीएफ से पूछताछ में सोनू स्वीकारता है कि अपने भाई के कहने पर भाई व अन्य साथियों के साथ मिलकर पूर्व विधयाक की हत्या की। जिसमें उसके अन्य साथी दोषी करार देकर उम्रकैद से दंडित किए गए। उसके बाद वह खुद जरामय दुनिया में प्रवेश कर गया। इस घटना के बाद वह 4 वर्ष दिल्ली तिहाड़ जेल व अन्य जेलों में रहा। फरारी के दौरान उसने अपने कुछ नए दोस्तों हरेंद्र राणा आदि के जरिये अन्य अपराध किए। उस पर अलीगढ़, दिल्ली, गाजियाबाद, आगरा, ग्वालियर मध्य प्रदेश आदि में 20 के करीब अपराध दर्ज हैं। वह भाड़े पर हत्या करने के आरोपी गैंग का लीडर है।
जिला पुलिस की टीम व अन्य टीमें सोनू को तलाश रही थीं। उसे एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार कर बुलंदशहर जेल दाखिल किया गया है। बाकी जो बुलंदशहर न्यायालय का आदेश होगा, उस पर काम किया जाएगाा।
-कलानिधि नैथानी, एसएसपी