हाथरस जिला अस्पताल में महिला की मौत के बाद सरकारी शव वाहन नहीं मिलने और शव को कंधे पर अस्पताल से बाहर लाने के मामले में सीएमओ का तर्क अपर निदेशक स्वास्थ्य (एडी हेल्थ) के गले नहीं उतर रहा। अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. वीके सिंह मानते हैं कि बेशक परिवार के पास अपना वाहन था तो शव को वाहन तक क्यों नहीं पहुंचवाया गया। उन्होंने सीएमओ, सीएमएस सहित अन्य स्टाफ से स्पष्टीकरण तलब किया है, जिसमें सीएमओ ने वही जवाब दिया है, जो एसडीएम ने जांच में पाया है, मगर अपर निदेशक का मानना है कि सभी के जवाब मिलने पर कार्रवाई तय होगी।
यह घटनाक्रम मंगलवार का है। हाथरस जंक्शन क्षेत्र के गांव चिंतापुर बदन की महिला प्रवेश को परिजन हाथरस जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव को खुद इमरजेंसी से कंधे पर लादकर बाहर लाए। बाद में अपने वाहन में ले गए। इसका वीडियो वायरल होने पर हायतौबा मची। अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. वीके सिंह ने मंडल के चारों जिलों के सरकारी शव वाहनों का ब्योरा तलब किया है। जिसमें उन्होंने मांगा है कि वाहनों का पिछले वर्षों में कब, कहां, कैसे प्रयोग हुआ है। उन पर तैनात स्टाफ, खर्च आदि की जानकारी मांगी है। साथ ही, हाथरस के सीएमओ, सीएमएस व अन्य स्टाफ से स्पष्टीकरण तलब किया है।
अपर निदेशक बताते हैं कि सीएमओ हाथरस ने अपना जवाब भेजा है, जिसमें उन्होंने वही तथ्य उल्लेखित किया है, जो एसडीएम ने अपनी जांच में पाया है। इस पर अपर निदेशक का तर्क है कि बेशक किसी के पास अपना वाहन है तो ये कहां न्याय संगत है कि शव को परिजन कंधे पर लादकर अस्पताल के बाहर लाएं। इसके लिए इमरजेंसी स्टाफ प्रशिक्षित होता है। शव या मरीज को स्ट्रेचर के जरिये बाहर वाहन तक पहुंचाया जाता है। चाहे वाहन किसी का हो। इस मामले में सभी के जवाब आने पर कार्रवाई तय की जाएगी। साथ में मंडल के चारों जनपदों के शव वाहनों के क्रियाकलापों की समीक्षा के बाद भविष्य के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी।