दीपावली और गोवर्धन पूजा के बीच में कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या वाले दिन (25 अक्तूबर) भारत में खंडग्रास सूर्यग्रहण पड़ेगा। इस बार सूर्य ग्रहण कई राशियों को प्रभावित करेगा। शास्त्रों के अनुसार, अन्नकूट गोवर्धन पूजा 26 अक्तूबर को करना श्रेष्ठ माना जाएगा। 27 अक्तूबर को भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा।
श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि भारतीय समयानुसार दोपहर 2:29 बजे से सूर्य ग्रहण लगेगा, जो पूरे भारत वर्ष में प्रारंभ हो जाएगा। इसकी समाप्ति शाम 6:32 बजे पर होगी। अलीगढ़ में ग्रहण का प्रारंभ शाम 4:32 बजे से होगा और समाप्ति 6:27 बजे पर होगी।
उन्होंने बताया कि सूर्यग्रहण वाले दिन प्रात: 4:29 बजे से ही पूरे भारतवर्ष में सूतक पातक दोष की शुरुआत हो जाएगी। सूतक के दौरान भोजन बनाना और उसे ग्रहण करना निषेध माना जाता है। इसमें आसक्त रोग ग्रस्त, असमर्थ बालक आदि को प्रतिबंधित नहीं किया गया है।
ग्रहण काल में अन्नकूट गोवर्धन पूजा निषेध रहेगी, क्योंकि सूतक काल या ग्रहण काल में ठाकुर जी के लिए पकवान नहीं बनेंगे और न ही भगवान को भोग लगाया जा सकता है। इस अवधि में सभी देवालयों के पट (दर्शन) बंद रहेंगे। यहां एक विशेष बात है कि इस दिन भारत वर्ष में ग्रहण पढ़ते ही सूर्य देव अस्त होते जाएंगे। अगले दिन 26 अक्तूबर को सूर्य के दर्शन उपरांत स्नान, दान आदि के पश्चात सूतक की निवृत्ति होगी। दीपावली के अगले दिन 25 अक्तूबर को गोवर्धन पूजा के समय प्रतिपदा तिथि का अभाव है।
राशियों पर ग्रहण का शुभ- अशुभ प्रभाव
मेष, मिथुन, कन्या, कुंभ राशि वालों के लिए ग्रहण का प्रभाव सामान्य रहेगा और नुकसान की संभावना कम रहेगी। वृष, सिंह, धनु एवं मकर राशियों के लिए यह ग्रहण या ग्रहण के उपरांत छह माह तक शुभ कार्यों की उम्मीद की जा सकती है। कर्क, तुला, वृश्चिक और मीन राशि के लिए इस ग्रहण का प्रभाव खतरनाक या गलत साबित हो सकता है।
ग्रहण का प्रभाव ग्रहण काल से छह माह तक मान्य रहता है। यह ग्रहण स्वाति नक्षत्र एवं तुला राशि पर पड़ रहा है। शेष राशि एवं नक्षत्र वाले लोगों को परेशानी, घर में कोई बड़ा रोका, किसी कलाकार या युवा नेता को किसी प्रकार का आर्थिक कष्ट संभव है। इस नक्षत्र एवं राशि वालों को ग्रहण के दर्शन करना अशुभ माना जाएगा।