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इतने हुए करीब कि हम दूर हो गए: हर रोज 15 प्रकरण पहुंच रहे पुलिस के पास, उसमें एक तिहाई लव मैरिज जोड़ों के

Tue, 14 Feb 2023 02:20 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अभिषेक शर्मा

सार

पुलिस के पास हर दिन दंपती विवाद के 15 प्रकरण पहुंचते हैं। जिनमें एक तिहाई प्रकरण प्रेम विवाह के बाद होने वाले विवाद के होते हैं।  सभी मामलों में काउंसलिंग के जरिये सुलह कराने का प्रयास किया जाता है। बात न बनने पर कार्रवाई, मुकदमा या परिवार न्यायालय भेजा जाता है।
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तलाक
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विस्तार
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जिला पुलिस से लेकर परिवार न्यायालय तक पहुंचने वाले प्रकरणों को लेकर 1982 में बनी हिंदी फिल्म साथ-साथ का वह गाना याद आता है। जिसमें दीप्ती नवल फारुख शेख पर गाना गाती हैं कि यूं जिंदगी की राह में मजबूर हो गए, इतने हुए करीब कि हम दूर हो गए। आज वेलेंटाइन डे मनाने जा रहे प्रेमी जोड़ों को कोई भी निर्णय लेने से पहले इस गाने के साथ मौजूदा हालात को भी ध्यान में रखना चाहिए। आलम ये है कि जिला पुलिस के पास हर दिन दंपती विवाद के 15 प्रकरण पहुंचते हैं। जिनमें एक तिहाई प्रकरण प्रेम विवाह के बाद होने वाले विवाद के होते हैं।
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जिला स्तर पर थानों के अलावा पुलिस मुख्यालय पर एक परिवार परामर्श केंद्र व महिला थाना में दंपती विवाद के मामले सुने जाते हैं। इन सभी पटलों पर अपने जिले का आंकड़ा है कि प्रति दिन 15 ऐसे मामले पहुंचते हैं, जो दंपती विवाद के होते हैं। जिनमें एक तिहाई मामले प्रेम विवाह के बाद दंपती में विवाद के होते हैं। यहां काउंसलिंग के बाद सुलह के प्रयास किए जाते हैं। यहां बात न बनने पर एक समय के बाद जरूरत पर मुकदमा या फिर आगे की कार्यवाही के लिए उन्हें परिवार न्यायालय को भेजा जाता है। परिवार न्यायालय में भी काउंसलिंग की प्रक्रिया अपनाई जाती है।

अपने जिले में परिवार न्यायालय में पिछले दिनों 44 मामलों में दंपतियों को साथ भेजा गया है, जबकि 60 मामलों में दंपती अलग हुए हैं। यह सहमति के आधार पर हुआ है। काउंसलर अधिवक्ता योगेश सारस्वत बताते हैं कि पहले हर दम प्रयास दंपती को साथ भेजने पर होता है। जब बात नहीं बनती, तभी अलग होने पर निर्णय अदालत स्तर से लिया जाता है। वे बताते हैं अदालत में जो मुकदमे लंबित हैं या जिनके निर्णय हुए हैं, उनमें एक तिहाई मामले प्रेम विवाह के बाद के सामने आते हैं।
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एसएसपी कलानिधि नैथानी ने कहा कि पारिवारिक विवाद के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। जिनमें प्रेम विवाह के बाद के मामले एक तिहाई सामने आते हैं। सभी मामलों में काउंसलिंग के जरिये सुलह कराने का प्रयास किया जाता है। बात न बनने पर कार्रवाई, मुकदमा या परिवार न्यायालय भेजा जाता है।

परिवार न्यायालय के ये हैं आंकड़े
  • 15 नए जोड़ों में आपसी विवाद प्रकरण के पुलिस के पास हर दिन पहुंचते हैं
  • 44 जोड़े परिवार न्यायालय में पिछले कुछ माह में सहमति से साथ गए
  • 60 जोड़े परिवार न्यायालय में पिछले कुछ माह में सहमति से अलग हुए
  • 32 जोड़ों के बीच पिछले वर्ष तलाक पर सहमति बनी, दोनों अलग हुए

केस1 : रोरावर क्षेत्र के दंपती की शादी 2015 में हुई। दो बच्चों के जन्म के बाद पति पत्नी में शारीरिक संबंध बनाने को लेकर शुरू हुआ विवाद परिवार न्यायालय तक पहुंचा। पंचायत में सहमति नहीं बनी। मगर परिवार न्यायालय में साथ जाने को दोनों तैयार हुए।
केस2 : गभाना क्षेत्र के दंपती की शादी 2015 में हुई। दहेज संबंधी आरोप के चलते विवाद शुरू हुए और महिला मायके आकर रहने लगी। बाद में प्रकरण परिवार न्यायालय तक पहुंचा। यहां काउंसलिंग के बाद दोनों साथ जाने को तैयार हुए।
केस 3 : खैर क्षेत्र के दंपती की शादी आपसी मर्जी से 2020 में हुई। दोनों में अपने कैरियर को लेकर शादी के बाद मनमुटाव शुरू हुए और बात अदालत तक पहुंच गई। काफी प्रयास के बाद भी सहमति नहीं बनी। अब दोनों के बीच तलाक की स्थिति तैयार है। परिणाम आने का इंतजार है।
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