स्मार्ट सिटी परियोजना से शहर के कायाकल्प की उम्मीद लगाए शहरवासियों को अभी तक निराशा ही हाथ लगी है। पांच साल से स्मार्ट सिटी परियोजना का काम जारी है, इसके बाद भी अधिकांश काम आधे-अधूरे पड़े हैं। वहीं, विकास कार्यों के नाम पर शहर की ज्यादातर सड़कें खुदी पड़ी हैं। तमाम शिकायतों के बाद भी अफसरों का इस ओर ध्यान नहीं है।
पिछले साल तक तो इन अधूरे कामों के लिए अधिकारी कोरोना काल का हवाला दे रहे थे, लेकिन इस साल के नौ महीने गुजर चुके हैं, इसके बाद काम में गति नहीं आई है।
खुदी पड़ी सड़कों से उठ रहे धूल के गुबार
शहर के विकास के लिए वर्ष 2017 में स्मार्ट सिटी परियोजना मंजूर हुई थी। इस परियोजना के तहत 42 विकास और निर्माण कार्य होने हैं। इन कार्यों के चलते शहर की तमाम सड़कों को खोद दिया गया है। इससे उड़ने वाले धूल के गुबार से राहगीरों एवं वाहन चालकों को परेशान होना पड़ रहा है। शहर में जाम का कारण भी खुदी सड़कें बन रही हैं।
ये होने थे काम
- शहर के प्रमुख धार्मिक स्थल अचल सरोवर का 25 करोड़ रुपये से नवनिर्वाण और सौंदर्यीकरण।
- 41.72 करोड़ रुपये से शहर के 14 चौराहों का अक्तूबर तक सौंदर्यीकरण होना था।
- एएमयू सर्किल से घंटाघर तक स्मार्ट रोड 16.85 करोड़ रुपये से जून में बनकर तैयार होनी थी, काम जारी है।
- सारसौल, क्वार्सी, एटा चुंगी, सासनीगेट समेत चार चौराहों का सौंदर्यीकरण 54.26 करोड़ रुपये की लागत से होना था, अब तक शुरूआत नहीं हो सकी है।
- नकवी पार्क का 17.53 करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण अभी तक पूरा नहीं हो सका है।
- शहर में सीवर एवं सीटीपी प्रोजेक्ट 500 करोड़ लागत से होना था, अब तक कार्य पूरा नहीं हो सका है।
ये हैं प्रमुख चौराहे
सिविल लाइंस क्षेत्र में अब्दुल्ला चौराहा, रामलीला मैदान, अग्रसेन चौक, मसूदाबाद, गांधीपार्क, मधेपुरा, दुबे का पड़ाव, सब्जी मंडी, जामा मस्जिद, शमशाद मार्केट, मदारगेट, तहसील तिराहा, कबरकुत्ता, तस्वीर महल चौराहों का स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत सौंदर्यीकरण होना था, लेकिन अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है।
स्मार्ट सिटी परियोजना में चल रहे कार्यों में तेजी लाई गई है। प्रयास किया जा रहा है कि प्रोजेक्ट अपने तय समय पर पूरे हों। समय-समय पर विकास कार्यों की समीक्षा करने के साथ ही उनका भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है। जल्द ही कार्य पूरे किए जाएंगे, जिससे शहरवासियों को राहत मिल सके।
- इंद्र विक्रम सिंह, डीएम