जिले में फिर से सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। बारिश कम होने के कारण धान की पौध पीली पड़ रही है। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं। फसल को बर्बाद होता देख किसान परेशान हैं। हालांकि, धान सहित अन्य फसलों को बचाने के लिए किसान पंपिंग सेट से सिंचाई करने में जुटे हैं। इससे किसानों का बजट भी गड़बड़ा रहा है।
जुलाई का महीना सूखा रहने के अगस्त में भी बारिश के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। हालात यह हैं कि सूरज के तेवर तीखे हैं। इस गर्मी ने मई-जून में पड़ने वाली गर्मी का अहसास करा दिया है। पिछले दो वर्षों में अच्छी बारिश होने से जिले में धान की अच्छी पैदावार हुई थी। इस बार काफी बड़े क्षेत्रफल में किसानों ने धान की रोपाई की है, लेकिन सूखे जैसे हालात बनते देख किसान परेशान हैं।
उप कृषि निदेशक जसराज सिंह ने कहा कि वर्षा न होने से खेतों में दरारें पड़ गई हैं। धान के साथ ही दलहन, चना, ज्वार, बाजरा, अरहर, मक्का, उड़द, मूंग जैसी फसलें भी बर्बाद हो जाएंगी। इस बार किसान उम्मीद से ज्यादा धान की फसल लगाए हैं, लेकिन बारिश ने सब कुछ खराब कर दिया है। ऐसी ही स्थिति कुछ दिन और बनी रही तो जनपद को सूखा घोषित किया जा सकता है।
अगस्त माह में हुई बारिश की स्थिति
वर्ष मानक वर्षा
2017 193 71.4
2018 193 94.8
2019 193 144.98
2020 193 145.92
2021 193 100.48
(नोट- वर्षा मिमी. में)