ये कुछ ताजा घटनाक्रम
-वर्ष 2014 गभाना के वीरमपुर में जमीनी विवाद में अनुसूचित युवक की हत्या की गई
-वर्ष 2017 में लोधा के केशोपुर जॉफरी में नाली विवाद में अनुसूचित-सवर्ण विवाद
-वर्ष 2021 में टप्पल के नूरपुर में बारात न चढ़ने देने पर अनुसूचित पलायन को मजबूर
-जून 2022 में 70 रुपये के विवाद में अनुसूचित युवक की हत्या के बाद पैदा हुआ तनाव
-जून 2022 में ही नूरपुर टप्पल में अनुसूचित बारात पर अंडा फेंकने का विवाद सामने आया
-जुलाई 2022 पालीमुकीमपुर एक अनुसूचित युवक की हत्या ने भी तूल पकड़ा था
-जुलाई 2022 में बरला में अनुसूचित सवर्ण झगड़े की घटना में पुलिस पर हमले का आरोप
हरदुआगंज में अनुसूचित परिवार से मारपीट और महिला को निर्वस्त्र करने की घटना ने जिले के ऐसे पुराने विवादों की याद ताजा करा दी है। ऐसे विवादों का जिले से पुराना नाता रहा है। हालांकि चंडौस का जहराना कांड एक ऐसा है, जिसे कभी शायद भुलाया नहीं जा सकता। एक साथ चार अनुसूचितों की हत्या ने प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी थी। बदले में कुछ दिन बाद सवर्ण आरोपी की हत्या हुई। दोनों ओर से मुकदमेबाजी के बीच गांव की एक सवर्ण किशोरी की हत्या ने फिर इस रंजिश को तूल दिया। किशोरी की हत्या का आरोपी 50 हजारी इनामी पप्पू इतवारी आज तक फरार है।
जहराना कांड 90 के दशक का प्रदेश का सबसे चर्चित कांड रहा है। हालांकि समय के साथ और पुलिस सख्ती के चलते दोनों ओर की रंजिश ठंडी पड़ती चली गई। अदालत स्तर से भी दोनों ओर से सजा सुनाई गई। इसी बीच 2007-08 में सवर्ण किशोरी की हत्या ने इस रंजिश को फिर से तूल दिया। इस घटना के बाद भी कई दिन तक इस गांव व आसपास के क्षेत्र में पुलिस सतर्कता के चलते कर्फ्यू जैसे हालात रहे। घटना का मुख्य आरोपी पप्पू इतवारी आज तक फरार है, जिस पर पुलिस स्तर से 50 हजार रुपये तक का इनाम है। पुलिस के एक दशक तक चले तमाम प्रयास के बाद भी जब वह नहीं पकड़ा गया तो पुलिस की फाइलों में यह इनामी कहीं दबकर रह गया।
हाल की कई घटनाओं में हुई चंद्रशेखर
बात ताजा कुछ घटनाक्रमों की करें तो जलाली, छर्रा, अकराबाद में हुईं घटना हमला व महिला उत्पीड़न की कुछ घटनाओं में आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर की एंट्री हुई। हालांकि जैसे तैसे पुलिस ने उन घटनाओं को नियंत्रित किया।
नूरपुर काफी सुर्खियों में रहता है
पिछले दो वर्ष से टप्पल का गांव नूरपुर काफी सुर्खियों में रहता है। ताजा विवाद यहां बारात पर अंडे फेंकने का सामने आया। इसी तरह पिछले वर्ष बारात को धर्म स्थल के पास रोका गया था। उस समय तो गांव के 250 लोगों ने पलायन और धर्म परिवर्तन तक की घोषणा कर दी थी। बाद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों व पुलिस की कार्रवाई के बाद बात संभाली गई।