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Aligarh News: गन्ने की जगह किसानों की उम्मीदों की पेराई कर रही साथा मिल, 21 महीने से है बंद

Fri, 01 Dec 2023 01:34 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो रिंकू शर्मा, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

अलीगढ़ की साथा चीनी मिल को फिर से खड़ा करने के नाम पर करोड़ों रुपये पूर्व में ही खर्च हो चुके हैं। इसके बाद गन्ना किसान इस बार भी पेराई के लिए दूसरी चीनी मिलों पर निर्भर हैं।
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दि सहकारी चीनी मिल साथा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ की एकमात्र दि सहकारी चीनी मिल साथा पिछले करीब 21 महीने से बंद है। चीनी मिल प्रबंधन द्वारा पेराई न होने पर जिले के किसानों का गन्ना बुलंदशहर स्थित साबितगढ़ एवं अनूपशहर स्थित चीन मिल पर भेजा जा रहा है। साथा चीनी मिल को फिर से खड़ा करने के नाम पर करोड़ों रुपये पूर्व में ही खर्च हो चुके हैं। इसके बाद गन्ना किसान इस बार भी पेराई के लिए दूसरी चीनी मिलों पर निर्भर हैं।

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खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ साथा चीनी मिल का नए सिरे से निर्माण कराने की घोषणा कर चुके हैं। चीनी मिल के लिए प्रशासनिक तंत्र की ओर से नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कराकर डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कराकर भेजी जा चुकी है। बस शासन स्तर से मंजूरी की घोषणा होना बाकी रह गया है।

चीनी मिल के नए सिरे से निर्माण के लिए करीब 300 करोड़ रुपये की दरकार है, लेकिन अभी तक शासन स्तर से बजट जारी न होने से चीनी मिल बंद है। मिल की मरम्मत पर पिछले पांच साल में ही 5.70 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। जिसमें वर्ष 2017-18 में 2.10 करोड़, 2019-20 में 2.35 करोड़ एवं वर्ष 2021 में 1.25 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
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गन्ने की खेती से किसानों का हो रहा मोह भंग
कभी गन्ना उत्पादन के अग्रणी जिलों में शामिल रहे अलीगढ़ में गन्ने का रकवा निरंतर घट रहा है। आकलन इसी बात से किया जा सकता है कि 16 वर्षों में गन्ने का रकबा पहले की तुलना में मात्र 25 फीसदी रह गया है। चीनी मिल के लंबे समय तक बंद होने से जिले के गन्ना किसानों का मोह गन्ना की खेती से हट रहा है। वर्ष 2015 में गन्ने का रकबा जहां 10,735 हेक्टेयर था जो तीन साल बाद घटकर 7,500 हेक्टेयर रह गया। वर्ष 2019 में 6,100 हेक्टेयर, 2020 में 5,000 हेक्टेयर, 2021 में 4,700 हेक्टेयर ही रह गया। इस साल यह रकबा 4500 हेक्टेयर तक जा सिमटा है। रकबा घटने से गन्ने का उत्पादन भी कम हो रहा है। वर्ष 2005-06 में गन्ने का रकवा 22 हजार हेक्टेयर था।

साथा चीनी के संचालन के लिए शासन स्तर से प्रयास जारी हैं। दिल्ली और मेरठ की टीमें यहां आकर सर्वे कर चुकी है। डीपीआर एवं सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बजट जारी हो जाने पर कार्य शुरू हो सकेगा।- राहुल कुमार यादव, प्रभारी महाप्रबंधक, दि किसान सहकारी मिल, साथा
किसानों से ऑनलाइन गन्ना खरीद पर्ची के आधार पर 15 केंद्रों पर गन्ना क्रय किया जा रहा है। जहां से नियमित उठान कराकर गन्ने को साबितगढ़ एवं अनूपशहर ( बुलंदशहर) चीनी मिल भिजवाया जा रहा है। किसानों का गन्ने का पिछला भुगतान हो चुका है।- डॉ. सुभाष यादव, जिला गन्ना अधिकारी
चीनी मिल के बंद रहने से गन्ना की खेती से मोह भंग हो रहा है। जिले में चीनी मिल होने के बाद भी दूसरी चीनी मिलों तक अपना गन्ना लेकर जाना पड़ रहा है। इसके लिए अधिक भाड़ा भी देना पड़ रहा है। सरकार को मिल का जल्द संचालन कराना चाहिए।- चौधरी अजय सिंह, किसान
बंद साथा चीनी मिल को चालू कराने का चुनाव से पूर्व एलान किया था, इसके बाद भी अब तक चीनी मिल का निर्माण तो दूर बंद मिल को भी चालू नहीं कराया गया है। सरकार को चीनी मिल के लिए धनराशि जारी कर उसे जल्द शुरू कराना चाहिए।- हरेंद्र सिंह, किसान

 

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खास बातें

  • साथा चीनी मिल से जुड़े किसानों का गन्ना बुलंदशहर की चीनी मिलों पर भेजा जा रहा
  • जिले में इस साल गन्ने का रकबा घटकर रह गया है केवल 4500 हेक्टेयर
  • फरवरी 2022 से बंद है साथा चीनी मिल
  • मुख्यमंत्री, जिले के प्रभारी मंत्री एवं कृषि मंत्री लक्ष्मीनारायण भी कर चुके हैं मिल के निर्माण का एलान

जिले में गन्ना-चीनी मिल की स्थिति
  • साथा चीनी मिल की स्थापना : वर्ष 1969
  • स्थापना के समय पेराई क्षमता : 12500 क्विंटल प्रतिदिन
  • साथा मिल को आवंटित : 950 हेक्टेयर क्षेत्र का गन्ना

शेष गन्ना : साबितगढ़ मिल बुलंदशहर, न्यौली मिल कासगंज एवं अन्य मिलों में स्थानांतरित
  • गन्ने का कुल रकवा : 4500 हेक्टेयर
  • कुल गन्ना किसान : करीब दस हजार
  • कुल उत्पादन : 36 लाख क्विंटल
  • कुल गन्ना क्रय केंद्र : 15

चीनी मिल की मरम्मत पर हुआ खर्चा
  • वर्ष 2017-18 में एक करोड़ रुपये
  • वर्ष 2018-19 में 1.10 करोड़ रुपये
  • वर्ष 2019-20 में 85 लाख रुपये
  • वर्ष 2020-21 में 1.50 करोड़ रुपया
  • वर्ष 2021-22 में 1.25 करोड़ रुपये
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