बैठक करते कमिश्नर गौरव दयाल साथ में डीएम इंद्र विक्रम सिंह और एसएसपी।
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नगर विकास विभाग की ओर से स्मार्ट सिटी योजना में संचालित इलेक्ट्रिक बसों के रूट और स्टाप का नए सिरे से निर्धारण होगा। महानगर के निवासियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बुधवार को मंडलायुक्त गौरव दयाल की अध्यक्षता में बैठक हुई। तय हुआ कि डीएम-एसएसपी की संयुक्त देखरेख में ई बसों के रूट का निर्धारण होगा।
सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड की दूसरी बैठक में मंडलायुक्त ने कहा कि शहर के सुनियोजित विकास में सुचारू यातायात व्यवस्था संजीवनी की तरह काम करती है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार नगर विकास विभाग के जरिए इलेक्ट्रिक बसों का संचालन नगर करा रही है। अभी इन बसों के संचालन में सुधार की गुंजाइश है।
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक शरद सिंह ने बताया कि महानगर में 15 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन पीएमआई कंपनी कर रही है। शासन से 10 नई बसें और मिली हैं। अब 25 इलेक्ट्रिक बस हो गई हैं। यात्रियों की सुविधा एवं राजस्व को देखते हुए बसों के रूट में फेरबदल करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि रूट परिवर्तन के साथ ही डीएम के निर्देश पर साइन बोर्ड लगाने के साथ ही शहर में बसों के स्टॉप भी बनाए जाएंगे। मंडलायुक्त ने कहा कि रूट निर्धारण समिति के माध्यम से डीएम-एसएसपी की अध्यक्षता में नये रूट का प्रस्ताव रखा जाए। नए रूट के गठन के साथ ही वर्तमान में संचालित रूट पर भी गहन समीक्षा कर उन पर बसों की संख्या एवं समय का निर्धारण किया जाए।
सबसे अधिक राजस्व खेरेश्वर मंदिर से बौनेर रूट पर
आरएम रोडवेज ने बताया कि खेरेश्वर मंदिर से बौनेर के रूट पर लगभग 20 हजार रुपये प्रतिदिन जबकि मंजूरगढ़ी से छर्रा अड्डा रूट पर महज 2500 रुपये का राजस्व मिल रहा है। डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने निर्धारित रूट पर बसों के ठहरने के लिए स्थान चिह्नित करने के साथ ही बस स्टाप पर साइन बोर्ड लगाने, रूटों का राजस्व के आधार पर निर्धारण करने के निर्देश दिए।