सरकार का दावा था कि बारिश से पहले सड़कों के सारे गड्ढे भर जाएंगे, लेकिन लापरवाही का आलम यह है कि न तो गड्ढे भरे गए हैं और न ही सड़कों की मरम्मत ही हो सकी है । ये गड्ढे वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। इसी के चलते वाहनों में भी काफी नुकसान हो रहा है।
राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 91 गाजियाबाद-अलीगढ़ एक्सप्रेसवे पर जिले में बौनेर से खुर्जा सीमा तक करीब 32 किमी का हिस्सा आता है। इसमें टूटी सड़क और उनमें गहरे गड्ढे हैं। स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद भी एनएचएआई इस ओर कोई ध्यान दे रहा है। इस सड़क पर दुर्घटना से बचाव के लिए फ्लैक्स और साइन बोर्ड भी नहीं लगे हैं।
इस हाईवे पर खेरेश्वर चौराहे के आसरास कई स्थानों पर सड़क पर गढ्ढे हैं। बीच-बीच में पैचवर्क कर खानापूर्ति कर दी गई है। जिसके कारण फिर वही स्थिति ह ोगई है। पिछले एक माह में इन्हीं गड्ढों के चलते दस से अधिक हादसे हो चुके हैं। जिसमें दो दर्जन से अधिक लोग घायल भी हो चुके हैं, तीन लोग अपनी जान तक गवां चुके हैं। मथुरा, आगरा रोड पर भी कई स्थानों पर सड़क में हो रहे गड्ढे हादसों का कारण बने हैं। इगलास, मडराक, अतरौली, बरला, गंगीरी, अकराबाद, जलाली, हरदुआगंज, जवां, बरौली, गभाना, चंडौस, जट्टारी आदि क्षेत्रों में गांवों को जाने वाले संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हैं।
शहर में भी गड्ढों की भरमार
शहर में आगरा रोड से लेकर सासनीगेट चौराहा और गांधीपार्क बस स्टैंड तक गड्ढे हैं। छर्रा अड्डा पुल से लेकर एटा चुंगी, धनीपुर मंडी के पास भी सड़क बेहद खस्ताहाल में है । यहां पर तो कदम-कदम पर गड्ढे हैं। मीनाक्षी पुल पर सड़क काफी क्षतिग्रस्त है। ठीक इसी के नीचे से रेलवे लाइन होकर जाती है, जिसके कारण हर समय खतरा बना रहता है। इसी वजह से वाहनों की रफ्तार बमुश्किल 10 किमी ही रह जाती है।
सड़कों में हो रहे गड्ढों को भरने का बारिश से पहले अभियान चलाया गया था। बारिश से फिर कुछ स्थानों पर फिर से गड्ढे हो गए हैं, इन्हें जल्द भरवाया जाएगा।
- योगेश कुमार, अधिशासी अभिंयंता पीडब्ल्यूडी