अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
जैसा अफसर चाहते थे, वैसा नहीं हुआ। मुख्यमंत्री को उनके दूत का संदेश मिला और उन्होंने लोधा से हवाई मार्ग के बजाय सड़क मार्ग से कमिशभनरी तक आकर बदहाल शहर का सूरत-ए-हाल देखा। बस फिर क्या था? इसका सीधा असर विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में देखने को मिला।
पीडब्ल्यूडी को आड़े हाथ लिया। स्वास्थ्य सेवाओं पर असंतोष जताया। नगर आयुक्त की नई तैनाती के चलते नगर निगम को जल्द से जल्द शहर में बेहतर सुधार के निर्देश देते हुए हिदायत देकर छोड़ा। हालांकि, अधिकारियों ने ऐन वक्त पर बदले रूट प्लान के चलते शहर की सड़कों में पैबंद लगाने और गंदगी-जलभराव वाले इलाकों को कपड़ों से ढककर छिपाने का प्रयास किए। मगर ये प्रयास नाकाफी रहे।
एनवक्त पर इस तरह बदला रूट प्लान
पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री को पहले लोधा और फिर वहां से हेलीकॉप्टर से पीएसी आना था। फिर पीएसी से कमिशभनरी तक आना था। इस बीच कमिशभनरी से हैबिटेट सेंटर तक जाने का प्लान था, जिसे लेकर प्रशासन ने पूरी तैयारी कर रखी थी और रूट डायवर्जन आदि भी लागू किया गया था, जिन जगहों पर गड्ढे या गंदगी थी, वहां सफाई व गड्ढे भरवाए गए।
मगर शुक्रवार को कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही जब अलीगढ़ आए तो संगठन के लोगों और जनप्रतिनिधियों ने उनके समक्ष विषय रखा कि मुख्यमंत्री अगर सड़क मार्ग से शहर में आएंगे तो इसका एक संदेश जाएगा। साथ ही, वे शहर की हकीकत भी देख सकेंगे। बस फिर क्या था। सुबह होते ही प्रोग्राम आया कि मुख्यमंत्री लोधा से कमिशभनरी सड़क मार्ग से जाएंगे। यह सुनकर अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए।
आनन-फानन नादा पुल, खेरेश्वर बाईपास, सारसौल, तहसील तिराहा, जेल रोड, तस्वीर महल आदि जगहों पर सुबह से गड्ढे भरवाने का प्रयास किया। जिन जगहों पर धूल के गुबार थे। उन जगहों पर पानी छिड़काव दिनभर किया जाता रहा। जहां कूड़े के ढेर व जलभराव था, वहां कपड़े बांधकर उन्हें ढकवाया गया। कुछ जगहों पर अतिक्रमण को भी हटवाया गया। बावजूद इसके मुख्यमंत्री की आंखों से हकीकत छिप न सकी।
बोले सीएम, सफाई और ड्रेनेज सही न होने तक कैसा स्मार्ट सिटी
मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान जनप्रतिनिधियों के सुझाव सुनने के साथ अधिकारियों से वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोई शहर तब तक स्मार्ट नही होता जब तक उसकी सड़कें, गलियां, नालियां, नाले स्वच्छ न हो, ड्रेनेज सिस्टम सही न हो। आईसीसीसी निर्माण कार्य के बारे में उन्होंने कहा कि यदि पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय कर कार्य किया गया होता तो यह कार्य काफी कम खर्चे में पूरा किया जा सकता था।
उन्होंने सेफ सिटी की परिकल्पना को साकार करने के निर्देश दिए। चौराहों के सौंदर्यीकरण, सड़कों के साथ नाले नालियों में कूड़ा न पड़ने के निर्देश दिए। पब्लिक एड्रेेस सिस्टम का उपयोग करने, बेतरतीब होर्डिंग नहीं लगने, डिजिटल विज्ञापन की तरफ बढ़ने, दुुरुस्त स्ट्रीट लाइट लगने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहर में सुधार की बहुत जरूरत है। कुछ नये मॉडल कार्य देने होंगे।
ये भी दिए निर्देश
- माफिया पर कार्रवाई करें, जिससे सराहना होती है।
- शराब माफिया पर कार्रवाई बेहद सरहनीय कार्य था।
- लंबित मामलों के निस्तारण की हर स्तर पर समीक्षा।
- अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।
- सड़कों की पटरियां खाली हों ताकि फुटपाथ बनें।
- स्ट्रीट वेंडर के जीवन में बेहतर बदलाव लाया जाए।
- सड़क पर कोई व्यक्ति सोता हुआ नजर न आए।
- नगर निकाय को आत्मनिर्भर बनाया जाए।
- जल जीवन मिशन के कार्य समय से पूरा हों।
- पेयजल योजना में सड़क को काटने के बाद उन्हें उखड़ी न छोड़ें।
- यह सुनिश्चित करें कि जर्जर विद्यालयों में बच्चे न बैठें।
- स्मार्ट सिटी के तहत विद्यालयों का निर्माण कराया जाए।
- एयरपोर्ट से शहर की कनेक्टिविटी को बेहतर किया जाए।
- एडीए को नक्शों के सरलीकरण कर कैंप लगाए जाएं।
- ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पेट्रोलिंग हो।
- जिन धर्म स्थलों से लाउडस्पीकर उतारे गए हैं वे फिर न लगें।
- जिनकी आवाज कम की गई है कम ही रहे।
- सड़कों पर स्टंट्स या अवैध स्टैंड कतई न लगें।
- अफसर राजस्व बढ़ाने में विशेष रुचि लें, समीक्षा हो।
इन मुद्दों पर की विशेष टिप्पणी
- उन्होंने कहा कि किसी शहर के लिए नुमाइश मैदान एक पहचान के तौर पर होता है, लेकिन यहां के नुमाइश मैदान में पानी भरा होना उचित नहीं है, इस ओर ध्यान देना होगा।
- शहर की सड़कों को लेकर उन्होंने तीखे शब्दों में पीडब्ल्यूडी के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि अब तक गड्ढे क्यों नहीं भरे गए हैं। इस काम को जल्द पूरा किया जाए।
- देहात के स्वास्थ्य केंद्रों के प्रति टिप्पणी करते हुए सीएमओ से कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की बेहद जरूरत है। इस तरफ विशेष ध्यान दिया जाए और काम हो।