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Aligarh: अगवा नहीं हुए, मुंबई में बेटियों के पास हैं AMU के सेवानिवृत्त प्रोफेसर; बेटे ने दर्ज कराया था मुकदमा

Sun, 28 Jul 2024 11:59 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

जाकिर हुसैन स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल डॉ. शहनाज के पति व एएमयू के सेवानिवृत्त प्रोफेसर मो. इशरत हुसैन खान अगवा नहीं हुए, बल्कि वह अपनी बेटियों के पास अपनी मर्जी से सुरक्षित रह रहे हैं।
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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अलीगढ़ में जाकिर हुसैन स्कूल की पूर्व प्रिंसिपल स्व. डॉ. शहनाज के पति व एएमयू के सेवानिवृत्त प्रोफेसर मो. इशरत हुसैन खान अगवा नहीं हुए, बल्कि वह अपनी बेटियों के पास अपनी मर्जी से सुरक्षित रह रहे हैं। अपहरण के संबंध में मुकदमे की खबर पर सेवानिवृत्त प्रोफेसर ने यह जानकारी वीडियो व शपथ पत्र के जरिये अलीगढ़ पुलिस व सीएम यूपी को भेजी है। भेजे गए पत्र में उन्होंने मामले में जांच का अनुरोध किया है।

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पिता को अगवा कर लिए जाने के संबंध में उनके बेटे एएमयू के बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद नवेद खान ने 19 जुलाई को मुकदमा दर्ज कराया था। सिविल लाइंस में दर्ज मुकदमे में अपनी दोनों बहनों व बहनोई आरोपी बनाए थे। आरोप था कि 17 जून 2022 को पिता को आरोपी अज्ञात जगह ले गए। तब से न संपर्क है और न जानकारी है। संपत्ति के फेर में अपहरण व हत्या तक का अंदेशा जताते हुए मुकदमा दर्ज कराया। दुबई में रहने वाली छोटी बहन हुमेरा खान व उसके पति मोहम्मद शोएब सिद्दीकी, मुंबई में रहने वाली दूूसरी छोटी बहन जेबा खान उर्फ जेबा तारिक हुसैन खान व उसके पति तारिक हुसैन खान आरोपी बनाए।

पूर्व प्रोफेसर ने वीडियो व पत्र में बेटों पर लगाए आरोप
एएमयू के बॉटनी विभाग के सेवानिवृत्त प्रो. इशरत हुसैन की ओर से अलीगढ़ पुलिस व सीएम को वीडियो के साथ शपथ पत्र सहित शिकायत भेजी है, जिसमें कहा है कि जुलाई 2022 में उन्होंने अपने दो बेटों प्रो. नावेद, मो. फैसल खान व इनकी पत्नियों फिज़़ा तबस्सुम आज़मी और तैयबा लियाकत को संपत्ति से बेदखल किया था। उसी समय उन्हें अपने जीवन और संपत्तियों को लेकर खतरे का अहसास था। इसी के चलते अब अपनी बेटियों डॉ. हुमैरा खान व डा. जेबा खान के पास मुंबई में रह रहा हूं। इसी के साथ उनके मुंबई निवासी अधिवक्ता जमाल ए. खान की ओर से सीएम यूपी को लिखा गया है कि बेटी और दामाद द्वारा अपहरण का यह आरोप अजीबोगरीब है। बहुत ही घटिया तत्व और मनगढ़ंत कहानी है। अधिवक्ता ने मुकदमा लिखकर मानसिक क्षति पहुंचाने, परेशान करने, झूठी सूचना देकर गुमराह करने का आरोप लगाकर बिना जांच मुकदमा लिखने वाले अधिकारी पर कार्रवाई का अनुरोध किया है।

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यह बिल्कुल सही है कि सेवानिवृत्त प्रो. नवेद की तहरीर पर यह मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें कई बार उनकी बहन से संपर्क किया गया और बुलाया गया। मगर वे नहीं आए। अब वे यहां आकर बयान दर्ज कराएं। उसी आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा। - अमृत जैन, सीओ तृतीय।

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