राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय (आरएमपीयू) अलीगढ़ प्रशासन ने आजादी से पहले के श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय (एसवी कॉलेज) में सीटों को लेकर अड़ंगा डाल दिया है। विवि ने विधि, बी.कॉम, एम.कॉम में सीटें घटा दी हैं। यह फैसला विद्यार्थियों के अधिकारों पर कुठाराघात है। इस कॉलेज में निजी कॉलेज से काफी कम शुल्क है। इस नाते विद्यार्थियों और अभिभावकों का रुझान इस कॉलेज के लिए होता है।
बीएएलएलबी में 240 में से 120 बी.कॉम में 240 सीटों में से 160 सीटें और एम.कॉम में 240 सीटों में 60 सीटें कर दी गई हैं। प्रवेश प्रक्रिया शुरू चल रही है। सवाल उठता है कि अगर निर्धारित सीटों पर प्रवेश हो जाएंगे, तो विवि का आदेश किस तरह लागू होगा। क्या उनका शुल्क लौटाया जाएगा। उनके प्रवेश काे रद्द करने का मानक क्या होगा। इसका सटीक जवाब महाविद्यालय प्रशासन के पास नहीं है। अलबत्ता, विद्यार्थियों का किसी तरह का नुकसान न होने का जोर दिया जा रहा है।
1947 में अस्तित्व में आया कॉलेज
जुलाई 1947 में बारहसैनी कॉलेज के नाम से महाविद्यालय आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध हो गया। 1967-68 में शासन और विवि की सहमति से इसका नाम श्री वार्ष्णेय महाविद्यालय कर दिया गया। वर्तमान में यह महाविद्यालय आरएमपीयू से संबद्ध है।
सीटों की कटौती को लेकर विवि के कुलसचिव से भेंट की। उन्हें प्रपत्र सौंपे गए हैं। सीटें यथावत रखने और ईडब्लूएस के तहत 10 फीसदी सीटों को बढ़ाने के लिए भी अनुरोध किया गया है।
-प्रो. अरुण कुमार गुप्ता, प्राचार्य, एसवी कॉलेज
महाविद्यालयों में सीटों को लेकर कोई दिक्कत आ रही है, तो इस बारे में वह अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सीटों को लेकर कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि है।
-महेश कुमार, कुलसचिव, आरएमपीयू
ये रहे पूर्व छात्र
कोल विधायक अनिल पाराशर, पूर्व विधायक स्व. संजीव राजा, पीसीएस अधिकारी देवेंद्र गुप्ता, जिला स्तरीय अधिकारी डीके वर्मा। इनके अलावा यहां के विद्यार्थी डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, शिक्षक हैं।