मडराक नगर पंचायत का नाम श्री राम नगर किए जाने संबंधी क्षेत्रीय विधायक के प्रस्ताव का लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है। कहा है कि मडराक कस्बे ने आजादी के आंदोलन में महती भूमिका निभाई है। अंग्रेजों से यहां के स्वतंत्रता सेनानियों ने लोहा लिया है। कस्बे का इतिहास गौरवशाली है। नाम बदलना अनुचित है। इसको लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया है।
विधायक अनिल पाराशर द्वारा पिछले दिनों शासन में जिले की नवसृजित नगर पंचायत मडराक का नाम श्री राम नगर रखने का प्रस्ताव दिया गया है। प्रस्ताव में कहा गया कि इलाके के एक मोहल्ले के नाम पर इसे श्री राम नगर नाम दिया जाए। विधायक के इस प्रस्ताव पर शासन स्तर से जिला प्रशासन से आख्या मांगी गई है। इस पर निकायों के नोडल एडीएम प्रशासन स्तर से एसडीएम व ईओ से ब्योरा तलब किया गया है। इस आधार पर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
सोशल मीडिया पर पक्ष-विपक्ष
इस कवायद के शुरू होते ही एक तरफ सोशल मीडिया पर पक्ष व विपक्ष में प्रतिक्रिया शुरू हो गई। कुछ लोग इसके समर्थन में खड़े हैं तो कुछ लोग विरोध में खड़े दिखाई दे रहे हैं। कोई इसे आस्था से जोड़कर विधायक के प्रस्ताव की तारीफ कर रहा है तो कोई इसे सियासत बताकर कहकर नाराजगी जता रहा है।
राष्ट्रपति को ज्ञापन में दिए ये तर्क
इधर, एनएसयूआई के जिला महासचिव पुलकित पाठक की अगुवाई में मडराक इंस्पेक्टर को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन दिया गया। ज्ञापन में कहा गया कि मडराक का नाम मडराक ही रहने दें, क्योंकि मडराक का इतिहास आज से लगभग कई सौ वर्ष पुराना है। यहां के ग्रामीण भी नहीं चाहते हैं कि नाम बदला जाए। मडराक में अंग्रेजों ने भी कई साल शासन किया। कई बार आक्रमण किए, फिर भी मडराक का नाम नहीं बदला है। मडराक कस्बा, पाली रजापुर सहित आसपास के कई गांवों में आजादी आंदोलन में कई स्वतंत्रता सेनानियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह इलाका जिले का केंद्र रहा। अगर नाम बदलना है तो उन महान लोगों के नाम पर मडराक के मोहल्लों का नाम किया जाए। अगर बदलना है तो मडराक की खराब पड़ी 70 फीसदी सड़क, शिक्षा, नाली, पेयजल व्यवस्था को बदला जाए। नाम बदलने का विरोध किया जाएगा। ज्ञापन देने वालों में मुकुल तोमर, मनीष पाठक, यतेंद्र कुशवाहा, रोहित गौड़, तरुण ठाकुर, यश, वाली आदि थे।
-विरोध करने वालों से ज्यादा समर्थन करने वालों की संख्या है। जनभावनाओं को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय लिया गया है और लिया जाएगा। किसी की जनभावना को ठेस पहुंचाना उद्देश्य नहीं है। मडराक कस्बे का नाम तो मडराक ही रहेगा। बस मडराक व आसपास के गांवों को मिलाकर सृजित नगर पंचायत को श्री राम नगर नाम देने का प्रस्ताव दिया है। अब कुछ लोगों को सियासत करनी है तो वे कर रहे होंगे। मैंने जनभावनाओं के आधार पर ही प्रस्ताव दिया है।
- अनिल पाराशर, विधायक भाजपा