नई इकाई का शिलान्यास 4 दिसंबर को होना था, लेकिन क्षेत्रीय लोगों के विरोध चलते इसको फिलहाल टाल दिया गया है। सीमेंट कंपनी व प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्रीय लोगों की समस्याएं सुनीं। क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि पूर्व में जो फैक्टरी लगी। उससे क्षेत्रीय लोगों को जबरदस्त वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण झेलना पड़ रहा है।
4 दिसंबर को रामपुर पंचायत घर पर अल्ट्राटेक सीमेंट की नई यूनिट स्थापित करने से पहले पर्यावरण स्वीकृत प्राप्त करने हेतु लोक सुनवाई हुई। जिसमें सीमेट कंपनी, स्थानीय लोग और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया। बढ़ते प्रदूषण के कारण स्थानीय लोग नई इकाई की स्थापना के विरोध में आ गए हैं। वहीं, कुछ लोग स्थापना के पक्ष में हैं, उन्होंने भी अपने विचार रखे।
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बातचीत के दौरान कई बार दोनों पक्ष आपस में भिड़ते हुए दिखे। प्रशासनिक अधिकारी न होते तो बवाल हो सकता था। नई इकाई का शिलान्यास चार दिसंबर को होना था, लेकिन क्षेत्रीय लोगों के विरोध चलते इसको फिलहाल टाल दिया गया है। सीमेंट कंपनी व प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षेत्रीय लोगों की समस्याएं सुनीं। क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि पूर्व में जो फैक्टरी लगी। उससे क्षेत्रीय लोगों को जबरदस्त वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण झेलना पड़ रहा है। फेफड़ों के संक्रमण, सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों, लीवर और दिमाग में कैंसर की शिकायत हो रही है। बारीक धूल से खेती बर्बाद हो रही है।
पौधों की पत्तियां धूल के कारण पूरी तरह से प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाती हैं। जिससे उपज प्रभावित हुई है। दस वर्षों से यही समस्या है। इतनी समस्या झेलने के बाद भी सीमेंट कारखाने में स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिला। सीएसआर का धन अन्य क्षेत्र में लगाया जा रहा है।
लोगों का कहना था कि अगर इकाई की स्थापना करनी है तो प्रदूषण पर काबू किया जाए। अत्याधुनिक अस्पताल बना कर निशुल्क इलाज की व्यवस्था की जाए। कॉलेज स्थापना की जाए। साठ प्रतिशत मजदूर व तकनीशियन गांव और आसपास से होने चाहिए। जब तक यह मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक इकाई की स्थापना का विरोध जारी रहेगा।
कंपनी बोली प्रदूषण नहीं होगा तो प्रशासन बोला लिख कर दें
जवां। वहीं केबी रेड्डी डायरेक्टर पर्यावरण प्रमुख अधिकारी अल्ट्राटेक सीमेंट ने कहा कि जो इकाई बनने जा रही है, उसमें प्रदूषण की समस्या नहीं रहेगी। योग्यता के अनुसार क्षेत्रीय लोगों को नौकरी दी जाएगी। सीएसआर का पैसा इसी क्षेत्र में खर्च किया जाएगा। अस्पताल नहीं खुलवा सकते हैं, लेकिन सहयोग जरूर कर सकते हैं। इस पर एडीएम प्रशासन पंकज कुमार ने सीमेंट कंपनी के अधिकारियों से कहा कि जो भी वादे किए गये हैं। उन्हें लिखित में दें। एक प्रति जनप्रतिनिधियों को व एक प्रति प्रशासन को दें। पांच लोगों का समूह बनाएं। जिसके माध्यम से स्थानीय लोगों की समस्याओं को हल कराया जाए।
बैठक में ये रहे शामिल
बैठक में रामपुर, कासिमपुर, साथा व नगौला के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। इस मौके पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी डॉ. जेपी सिंह, रवेेंद्र सिंह चौहान, पिंटू सूर्यवंशी चेयरमैन प्रतिनिधि जवां, मनोज सिंह चेयरमैन बरौली, देवेन्द्र सिंह राघव, मनोज बघेल, सुखेंद्र सिंह, सोनू पंडित, विष्णु, सुरेंद्र सिंह, सतीश राघव, डोरीलाल शर्मा आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे।
आठ बीघा जमीन मुक्त करे सीमेंट कंपनी
वहीं ग्राम प्रधान कासिमपुर शिवकुमार चौहान ने कहा कि ग्राम पंचायत की लगभग साढ़े आठ बीघा जमीन पर अवैध कब्जा है। उस भूमि को सीमेंट कंपनी से मुक्त कराया जाए। इसकी शिकायत पहले भी उच्चाधिकारियों से की जा चुकी है।