जड़ाना नगलिया के प्रधान पति वीरेंद्र कुमार भाजपा के कार्यकर्ता थे। परिवार वालों के अनुसार आठ-दस दिन पहले ही धमकियां मिली थीं, लेकिन हमेशा की तरह गांव में होने वाले झगड़े की तरह इन धमकियों को नजरअंदाज कर गए। परिवार वालों को भी इस तरह हमले की आशंका नहीं थी।
ग्राम पंचायत की राजनीति में करीब 20 साल से प्रधान पति वीरेंद्र कुमार और पूर्व प्रधान संजय कुमार के बीच रंजिश चली आ रही है। इन्हीं दोनों के परिवारों से प्रधान बनते रहे हैं। पिछले पंचायत चुनाव में संजय कुमार प्रधान बने थे और वीरेंद्र कुमार हार गए थे। इस बार वीरेंद्र कुमार की पत्नी शीतल प्रधान हैं। बताते हैं कि दोनों के बीच गांव स्तर का झगड़ा होता रहता था। पार्टीबंदी में दोनों गांव के मसलों में एक-दूसरे के खिलाफ हस्तक्षेप करते रहते थे। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच झगड़ा भी होता था। थाने तक भी कई बार मामला पहुंचा लेकिन बाद में समझौता हो जाता था।
हत्या की खबर मिलने पर देर रात भाजपा के जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह लाला भी मौके पर पहुंच गए थे। उन्होंने बताया कि वीरेंद्र कुमार पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता थे, हालांकि उन पर कोई दायित्व नहीं था। मौके पर पुलिस अधिकारियों सहित फोरेंसिक टीम पहुंच गई थी। देर रात 12 बजे मौके से शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया था। गांव में पुलिस तैनात है।
तीन भाइयों में सबसे छोटे थे वीरेंद्र
प्रधान पति वीरेंद्र कुमार पुत्र जगदीश तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके पीछे बाइक पर चल रहे मणिशंकर सबसे बड़े भाई हैं। उनके साथ बाइक पर उनका साले लाला भी मौजूद थे। उन्होंने ही घटना को प्रत्यक्ष देखा है। मृतक के दो बच्चे 14 साल की बेटी काजल और 11 साल का बेटा लविश है।
बुद्धविहार डिपो में चालक थे वीरेंद्र
वीरेंद्र कुमार परिवहन विभाग में बुद्ध विहार डिपो में लंबे समय से चालक थे। बताते हैं कि जब से उनकी पत्नी जड़ना नगलिया की ग्र्राम प्रधान बनी हैं, तब से वह ड्यूटी पर न जाकर गांव में ही रह रहे थे। कभी बीमारी तो कभी और किसी बात पर वह वह अवकाश ही लगा रहे थे।