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अमावस्या पर भावपूर्ण स्मरण कर होगा पितृ तर्पण

सार

पितृ पक्ष में महालया अमावस्या का ज्योतिष एवं तंत्र शास्त्र में काफी महत्व है।अमावस्या के दिन सभी पितरों की विधिवत विदाई की जाती है और उनकी आत्मा की शांति के उपाय किए जाते हैं।घर में किसी भी अशुभ शक्तियों का प्रवेश नहीं होता है।
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विस्तार
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पितृ पक्ष में महालया अमावस्या का ज्योतिष एवं तंत्र शास्त्र में काफी महत्व है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन अपने पूर्वजों का स्मरण करने और तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि देवपितृकार्ये पितृ विसर्जन अमावस्या 25 सितंबर को है।
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अमावस्या के दिन सभी पितरों की विधिवत विदाई की जाती है और उनकी आत्मा की शांति के उपाय किए जाते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार तीन प्रकार के ऋण होते हैं। देव ऋण, ऋषि ऋण एवं पितृ ऋण। इनमें पितृ ऋण को सबसे प्रमुख माना गया है।
बताया कि घर की छत पर भी एक दीपक अवश्य ही जलाएं ।इससे घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है। घर में किसी भी अशुभ शक्तियों का प्रवेश नहीं होता है। घर के मंदिर में भी एक दीपक अवश्य ही जलाएं, इससे हमें अपने इष्ट देवता, कुल देवता और सभी देवताओं की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। उन्होंने बताया कि तर्पण करते समय एक पीतल के बर्तन में जल में गंगाजल, कच्चा दूध, तिल, जौ, तुलसी के पत्ते, दूब, शहद और सफेद फूल आदि डालकर पितरों का तर्पण करना चाहिए।
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शारदीय नवरात्र को लेकर मंदिरों पर शुरू हुई तैयारियां
नवरात्र को लेकर शहर से लेकर देेहात क्षेत्र के देवी मंदिरों पर रंगाई-पुताई के साथ ही साफ-सफाई शुरू हो गई है। कथा, भागवत कथा, देवी जागरण, गरबा, डांडिया समेत तमाम धार्मिक आयोजनों की खूब धूम देखने को मिलेगी। घरों में भक्त उपवास रखने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठान करेंगे।
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