लकवे के शिकार साइमन भारत भ्रमण पर
कौशल कुमार ओझा
अलीगढ़। केरल के कामरेड साइमन ब्रिटो कमाल के हैं। लकवा के शिकार कामरेड अपने पैर भी अपनी इच्छानुसार नहीं खिसका सकते। बेड पर पैर इधर से उधर करने के लिए कामरेड अर्जुन दास उनकी मदद करते हैं। लेकिन इरादा इतना बुलंद है कि तमाम तरह की मजबूरियों को रौंदते हुए भारत भ्रमण पर निकले हैं। अलीगढ़ में पहुंचते ही कम्युनिस्ट विचारधारा के लोगों का उनके पास तांता लग गया। कामरेड ब्रिटो केरल विधानसभा के सदस्य भी रह चुके हैं और अब तक कई पुस्तकें लिख चुके हैं। 1 अप्रैल 2015 को कामरेड साइमन ब्रिटो भारत भ्रमण के लिए केरल के कोच्चि से पुरानी एंबेसडर कार से रवाना हुए। केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ आदि प्रदेशों से होते हुए रविवार रात्रि को अलीगढ़ पहुंचे। इसकी सूचना मिलते ही कम्युनिस्ट नेता एवं कार्यकर्ताओं का उनके पास तांता लगा हुआ है। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन से ही उनकी भारत भ्रमण की इच्छा थी। 1983 में उन पर जान लेवा हमला हुआ। मृत समझकर लोग छोड़ गए थे। 1980 से 1993 तक एक कमरे में एक ही बेड पर रहा। जान बच गई लेकिन कमर के नीचे का हिस्सा लकवा ग्रस्त हो चुका है। नेचुरोपैथी, होमियोपैथी एवं आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज करा रहे है। 2006 से 2011 तक एंग्लो इंडियन कोटे से एमएलए (राज्यपाल द्वारा मनोनीत) रहे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के बाद वे बिहार, बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तेलंगना, कर्नाटक होते हुए केरल पहुंचेंगे।