19 अक्टूबर को गांव ऊंटासानी में यशवीर सिंह घरबरा की अध्यक्षता में यमुना खादर के गांवों के किसानों की पंचायत हुई। तय हुआ कि होडल (पलवल) क्षेत्र के किसानों के साथ खादर की कृषि भूमि के विवाद का प्रशासन ने निदान नहीं कराया तो खैर विधानसभा सीट के उपचुनाव में वह मतदान नहीं करेंगे। पंचायत का संचालन कल्लू धारागढ़ी ने किया। प्रकाश सिंह, मांगेराम, कल्लू, समसुद्दीन, जगदीश, नारायण सिंह, शारदा, संतोष पंडित, शैलेंद्र फौजी, आनंद, कुल्ली फौजी, कन्हैया, मोहनलाल पंडित सहित कई किसान मौजूद रहे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं।
इन किसानों ने कहा कि सीमा विवाद से गांव धारागढ़ी, घरबरा, समसपुर, लालपुर रैयतपुर, मालव, गिरधरपुर, ऊंटासानी, खादर सहित पलवल जिले के होडल तहसील के गांव सुल्तानपुर, कुशव, अच्छेजा, काशीपुर, अतवा, मुंतजाबाद, फास्टको नगर, बाली मोहम्मदपुर, माहोली, हसनपुर के किसानों के बीच वर्ष 1940 से भू स्वामित्व का झगड़ा चला आ रहा है। कई बार खूनी संघर्ष तक हो चुका है।
वर्ष 1974-75 में केंद्रीय गृहमंत्री उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में एक समिति बनी थी। उसकी अनुशंसा पर भारत सरकार की ओर से सीमा परिवर्तन अधिनियम 1979 पारित किया गया था, जिसे दीक्षित अवार्ड के नाम से जाना जाता है। इसमें स्पष्ट किया गया था कि यूपी की जो भूमि हरियाणा में हस्तांतरित हुई है, उस पर यूपी के किसानों का कब्जा और स्वामित्व रहेगा। लेकिन हरियाणा में प्रचलित भू संबंधी नियम लागू होंगे। इसी तरह हरियाणा की जो भूमि यूपी में हस्तांतरित हुई है, उस पर हरियाणा के किसानों का कब्जा व स्वामित्व रहेगा लेकिन प्रचलित भू संबंधी नियम यूपी के लागू होंगे।
5 सितंबर को भी एडीएम प्रशासन पंकज कुमार और एसडीएम होडल जनपद पलवल रनवीर सिंह आदि की मध्यस्थता में हसनपुर में बैठक हुई थी। इसके बावजूद टप्पल के खादर क्षेत्र के किसान यमुना के उस पार अपनी भूमि पर फसल काटने जाते हैं तो झगड़े की आशंका बनी हुई है।