विश्व कला दिवस 15 अप्रैल का होता है। यह दिवस उन चित्रकारों के लिए अहम है, जो बचपन से लेकर जवानी और बुढ़ापे की दहलीज पर चित्रकार लियोनार्डो द विंची का नाम सुन रहे हैं। लियोनार्डो की जयंती को विश्व कला दिवस के रूप में मनाया जाता है, उनकी प्रसिद्ध चित्रकारी मोनालिसा है। द विंची को आदर्श मानने वाले जिले के चित्रकार रंग और कूची से अपनी कला को जीवंत बना रहे हैं।
चित्रकार शिवाशीष शर्मा बताते हैं कि कला मतलब सौन्दर्यात्मक तरीके से किया गया कार्य है। ललित कलाओं की संख्या पांच बताई गई है। इनमें चित्रकला, मूर्तिकला, नृत्य, गायन और वादन शामिल है, लेकिन कला शब्द सुनते ही मस्तिष्क में केवल चित्रकला की छवि उत्पन्न हो जाती है। शिवाशीष प्रसिद्ध कवि प्रेम किशोर पटाखा के पुत्र हैं। इनकी चित्रकारी सिखाने वाली 22 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। करतारपुर कॉरिडोर तक अपनी चित्रकारी दर्शाने वाले शिवाशीष को वर्ष 2008 में पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम से सर्वश्रेष्ठ चित्रकार का पुरस्कार मिला चुका है।
पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से शिवाशीष को शिक्षार्थी बाल चित्रकला सम्मान मिल चुका है। शिवाशीष अभी स्वतंत्र चित्रकार हैं। कस्तूरी कला एजूकेशन सोसाइटी व कस्तूरी आर्ट स्टूडियो के संचालक हैं। वह अलीगढ़ में एक कला अकादमी की स्थापना करना चाहते हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चों को चित्रकला में मदद कर सकें। शिवाशीष इन दिनों अपनी चित्रकला प्रदर्शनी के कार्य में लगे हुए हैं। शिवाशीष के अलावा जिले के उभरते चित्रकार नवनीत कुमार, पारस मणि, मिंटू डागौर, अर्चित कश्यप, दिलीप आदि हैं, जो जिले का नाम रोशन कर रहे हैं।