पुलिस ने अदालत के आदेश पर तीनों स्कूलों के दस्तावेज सहित अधिकारी पेश किए। जिसमें इनाया स्कूल से प्रधानाचार्य मंजीत सिंह ने बताया कि उनके यहां बच्ची कक्षा 6 से 8 तक पढ़ी है। प्रोमिस स्कूल के उप प्रधानाचार्य मकसूद अली ने बताया कि उनके यहां बच्ची कक्षा 1 से पांच तक पढ़ी है। वहीं जीडीएमएस स्कूल के प्रधानाचार्य अरविंद गोयल ने बताया कि उनके यहां बच्ची कक्षा दो से चार तक पढ़ी है। यह सुनकर अदालत दंग रह गई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की ओर से जब टीसी पर सवाल खड़ा किया तो कोई स्कूल बच्चकी की टीसी नहीं दिखा सका। इस पर अदालत ने कहा कि जो बच्ची एक स्कूल में कक्षा एक से पांच तक पढ़ी है, वह उसी दौर में कक्षा दो से चार तक दूसरे स्कूल में कैसे पहुंची।
कुल मिलाकर स्कूलों के साक्ष्य व प्रमाण पत्र पर सवाल खड़े करते हुए सिविल जज/न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने साफ कहा है कि लडक़ी की उम्र के मामले में सभी साक्ष्य विरोधाभासी हैं। इसकी जांच के लिए बीएसए को जांच अधिकारी नामित किया है। तीन दिन में उन्हें जांच आख्या पेश करने, सही उम्र का प्रमाण पत्र तय करने और गलत स्कूल पर कार्रवाई तय करने को कहा है। इसके बाद ही लडक़ी की सुपुर्दगी तय की जाएगी। इस मामले में अब 25 तारीख नियत की है। इस मामले में लडक़ी पक्ष की ओर से पैरवी कस्बे के ही अधिवक्ता चंद्रांशु पाठक कर रहे हैं। वे स्कूलों के दस्तावेजों पर सवाल खडक़ कर रहे हैं।
मामला बेहद संगीन है। हालांकि अदालत का आदेश अभी मिला नहीं है। फिर भी इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी। दो स्कूलों में एक ही समय में लडक़ी कैसे पढ़ाई कर सकती है और टीसी भी नहीं है। इसकी गहराई से जांच की जाएगी। सच अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।-राकेश कुमार सिंह, बीएसए