फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अजीब मामला: लड़की एक, उम्र के चार अलग-अलग साक्ष्य, प्रेम विवाह मामले में अदालत ने दिया सच जानने का आदेश

Fri, 22 Sep 2023 01:38 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

अदालत ने बीएसए को सच जानने का आदेश दिया है और मामले में साफ कहा है कि सही उम्र का दस्तावेज कौन सा है? ये साफ किया जाए और इन स्कूलों में से गलत कौन है? उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए। अब मामले में सुनवाई के लिए 25 तारीख नियत की गई है।
विज्ञापन
कोर्ट - फोटो : प्रतीकात्मक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अलीगढ़ के हरदुआगंज कस्बे से लापता एक लडक़ी के प्रेम विवाह मामले में पुलिस व अदालत के सामने चुनौतीपूर्ण सवाल खड़ा हो गया है। अदालत में लडक़ी और पुलिस-परिवार की ओर से दाखिल किए गए प्रपत्रों के आधार पर उम्र के चार अलग-अलग साक्ष्य आ गए। जिनमें से दो स्कूलों के प्रमाण पत्रों ने तो एक दूसरे की विश्वसनीयता पर ही सवाल खड़ा कर दिया। मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अदालत ने बीएसए को सच जानने का आदेश दिया है और मामले में साफ कहा है कि सही उम्र का दस्तावेज कौन सा है? ये साफ किया जाए और इन स्कूलों में से गलत कौन है? उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाए। अदालत का यह आदेश बृहस्पतिवार शाम बीएसए कार्यालय में रिसीव करा दिया गया। अब मामले में सुनवाई के लिए 25 तारीख नियत की गई है।

विज्ञापन


प्रकरण के अनुसार कस्बा की एक लडक़ी 14 सितंबर को घर से घर से दूसरी गली में रहने वाली युवक संग चली गई और न्यायालय पहुंचकर उसने एक दरगाह में निकाह किया। इसके बाद दीवानी में अपना निकाह पंजीकृत कराया। इसके बाद वह घर जाने के बजाय अपने विवाहित प्रेमी के साथ उसके घर चली गई। जब यह खबर लडक़ी के परिवार को लगी तो मामले में थाने में उसी शाम बेटी को बहला फुसलाकर ले जाने का मुकदमा बेटी के प्रेमी शाहरुख पर दर्ज कराया और पुलिस ने भी कार्रवाई करते हुए शाहरुख को गिरफ्तार किया। अगले दिन उसे जेल भेज दिया। 

वहीं लडक़ी के 18 सितंबर को न्यायालय में बयान दर्ज कराए। इस दौरान लडक़ी ने अपनी उम्र, शिक्षा आदि के संबंध में जानकारी देते हुए मर्जी से शादी करने व लडक़े के घर जाने की बात कही। चूंकि कस्बे में लडक़ी का परिवार प्रभावशाली है और पुलिस में भी मजबूत पकड़ है तो कोई निर्णय पुलिस स्तर से नहीं लिया गया। मगर अगले दिन शाहरुख की मां की ओर से न्यायालय में अपनी पुत्रवधू की सुपुर्दगी संबंधी अर्जी दायर की गई। जिसमें पुत्रवधु की उम्र के प्रमाण पत्र के रूप में उसके पिता द्वारा बनवाए गए आधार व पैन कार्ड पेश किए गए। जिसमें लडक़ी की उम्र 1 मार्च 2004 के अनुसार 19 वर्ष 6 माह 19 दिन बताई गई। 
विज्ञापन


इधर, इसके विरोध में पुलिस के स्तर से लडक़ी की उम्र के साक्ष्य के तौर पर हरदुआगंज के इनाया पब्लिक स्कूल का प्रमाण पत्र पेश किया, जिसमें जन्मतिथि 1 जनवरी 2006 बताते हुए उम्र 17 वर्ष 8 माह 19 दिन बताई। साथ में प्रोमिस स्कूल का एक प्रमाण पत्र पेश किया, जिसमें जन्मतिथि 30 जून 2005 बताते हुए 18 वर्ष 3 माह 10 दिन बताई। वहीं पिता की ओर से जीडीएमएस स्कूल का प्रमाण पत्र पेश कर जन्मतिथि 9 नवंबर 2005 बताते हुए 17 वर्ष 2 माह 10 दिन बताई। इस तरह एक लडक़ी की उम्र के चार दस्तावेज आने पर अदालत ने तीनों स्कूलों के दस्तावेज प्रधानाचार्य सहित तलब कर शुक्रवार की तारीख नियत कर दी। 

विज्ञापन

पुलिस ने अदालत के आदेश पर तीनों स्कूलों के दस्तावेज सहित अधिकारी पेश किए। जिसमें इनाया स्कूल से प्रधानाचार्य मंजीत सिंह ने बताया कि उनके यहां बच्ची कक्षा 6 से 8 तक पढ़ी है। प्रोमिस स्कूल के उप प्रधानाचार्य मकसूद अली ने बताया कि उनके यहां बच्ची कक्षा 1 से पांच तक पढ़ी है। वहीं जीडीएमएस स्कूल के प्रधानाचार्य अरविंद गोयल ने बताया कि उनके यहां बच्ची कक्षा दो से चार तक पढ़ी है। यह सुनकर अदालत दंग रह गई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की ओर से जब टीसी पर सवाल खड़ा किया तो कोई स्कूल बच्चकी की टीसी नहीं दिखा सका। इस पर अदालत ने कहा कि जो बच्ची एक स्कूल में कक्षा एक से पांच तक पढ़ी है, वह उसी दौर में कक्षा दो से चार तक दूसरे स्कूल में कैसे पहुंची।

 कुल मिलाकर स्कूलों के साक्ष्य व प्रमाण पत्र पर सवाल खड़े करते हुए सिविल जज/न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने साफ कहा है कि लडक़ी की उम्र के मामले में सभी साक्ष्य विरोधाभासी हैं। इसकी जांच के लिए बीएसए को जांच अधिकारी नामित किया है। तीन दिन में उन्हें जांच आख्या पेश करने, सही उम्र का प्रमाण पत्र तय करने और गलत स्कूल पर कार्रवाई तय करने को कहा है।  इसके बाद ही लडक़ी की सुपुर्दगी तय की जाएगी। इस मामले में अब 25 तारीख नियत की है। इस मामले में लडक़ी पक्ष की ओर से पैरवी कस्बे के ही अधिवक्ता चंद्रांशु पाठक कर रहे हैं। वे स्कूलों के दस्तावेजों पर सवाल खडक़ कर रहे हैं।
मामला बेहद संगीन है। हालांकि अदालत का आदेश अभी मिला नहीं है। फिर भी इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी। दो स्कूलों में एक ही समय में लडक़ी कैसे पढ़ाई कर सकती है और टीसी भी नहीं है। इसकी गहराई से जांच की जाएगी। सच अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।-राकेश कुमार सिंह, बीएसए
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें