किसी भी देश, प्रदेश और शहर का विकास उसमें उद्योगों के विकसित होने से होता है। सरकार उसी सोच के साथ लगातार एमएसएमई में नए उद्यमियों को लाभान्वित कर उन्हें अवसर देने के लिए काम कर रही है। मगर यह योजनाएं अफसरशाही के मकड़जाल में फंसकर दम तोड़ जाती हैं। एमएसएमई में पूर्व में कितने उद्यमियों को लाभ मिला है, इन आंकड़ों की भी सरकार को समीक्षा करनी चाहिए। तभी योजनाएं सफल हो सकती हैं।
प्रदेश सरकार ने केबिनेट बैठक में एमएसएमई के लिए खजाना खोलने जैसा काम किया है। नई नीति को मंजूरी देते हुए निवेश पर 25 फीसदी की सब्सिडी, ब्याज में 50 फीसदी की छूट, महिलाओं व अनुसूचितों के लिए 60 फीसदी की छूट जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इससे नए उद्यमी उत्साहित और स्वीकार कर रहे हैं कि इसके अच्छे परिणाम सामने आ सकते हैं। मगर उनकी दलील है कि जब तक अफसरशाही का मकड़जाल नहीं हटेगा, तब तक इसे सफल करा पाना बेहद मुश्किल है।
तर्क है कि सब कुछ एक प्लेटफार्म पर हो तो बेहतर है। उद्योग विभाग के अपने तमाम नियम आड़े आते हैं। उन्हें दूर करते करते कोई भी नया व्यक्ति चक्कर लगाता रहता है। फिर बैंक को अलग से मनाना और समझाना पड़ता है। बैंक को समझा पाने में सफल हुए तो ठीक, अन्यथा फाइल वापस करने में बैंक जरा भी हिचक नहीं करती। ऐसे में सरकार को इस योजना के लिए सिर्फ एक प्लेटफार्म पर सब कुछ देने का प्रावधान करना होगा।
-सरकार की योजनाएं बहुत अच्छी हैं। एमएसएमई में अब तक सरकार ने काफी कुछ प्रावधान राहत भरे किए हुए हैं। मगर जटिलताएं इतनी हैं कि कोई भी नया अंजान कारोबारी चक्कर ही लगाता रहता है और नियमों को पूरा न कर पाने के कारण सब्सिडी का लाभ नहीं ले पाता। आज तक ताला नगरी के तमाम उद्यमियों की सब्सिडी लंबित पड़ी है।-सौरभ अग्रवाल, युवा उद्यमी
-योजनाओं को सरकार कारोबारी सोच के साथ लागू कर रही है। ये अच्छी बात है। इससे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। मगर अफसरों पर इस बात का शिकंजा होना चाहिए कि किसी भी तरह लक्ष्य पूरा कराया जाए। जटिलताओं में फंसे नए आवेदकों को मदद कराकर उन्हें लाभ दिलाया जाए।-ऋषभ गर्ग, युवा उद्यमी
-पांच साल की स्कीम लागू की है। महिलाओं को भी अच्छे अवसर दिए गए हैं। मगर आरबीआई का रैपो रेट ब्याज दर में छूट पर भारी पडे़गा। सरकार को इस तरफ भी ध्यान देना चाहिए। वर्तमान में भी रैपो रेट काफी अधिक है और लगातार बढ़ रहा है। पूर्व की योजनाओं का भी इसी वजह से लाभ नहीं मिल पाया है।-तूलिका अग्रवाल, युवा उद्यमी
-सरकार योजनाएं लागू कर रही है, ये अच्छी बात है। मगर नया कारोबारी या कोई भी नया व्यक्ति पहले महंगाई से बेहद परेशान है। उसे ऊपर से कर्ज और दे दिया जाए। ऐसे में वह किश्त देते देते ही परेशान होगा। सरकार को पहले महंगाई पर नियंत्रण के लिए भी सोचना होगा। तभी इन योजनाओं का नए कारोबारियों को बेहतर लाभ मिल सकेगा।-विजय गुप्ता, उद्यमी