फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खरीदारी कर पितरों को अर्पित करें, पाएं उनका आशीर्वाद

विज्ञापन
विज्ञापन
पितरों के तर्पण यानी श्राद्ध पक्ष की शुरुआत 10 सितंबर से हो रही है। इन 16 दिनों में मांगलिक कार्य जैसे विवाह, उपनयन संस्कार, मुंडन, गृह प्रवेश आदि शुभ कार्यों से लोग परहेज करते हैं। साथ ही, नई वस्तुओं की खरीद भी नहीं करते हैं। शहर के ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, श्राद्ध पक्ष को लेकर लोगों में यह गलत धारणा बनी हुई कि यह अशुभ समय होता है। लेकिन ऐसा नहीं है। उनका कहना है कि श्राद्ध पक्ष में पितर पृथ्वी पर आते हैं और वह देखते हैं कि उनकी संतान किस स्थिति में हैं। पितर अपनी संतान व वंशज की खुशहाली देखकर खुश होते हैं। नई वस्तु की खरीदारी कर पितरों को समर्पित करते हैं तो वह अपनी संतानों को आशीर्वाद देते हैं।
विज्ञापन

ये है मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार, 16 दिनों तक चलने वाले पितृ पक्ष का मृत्यु से संबंध होता है, जिस प्रकार हम अपने परिजनों की मृत्यु पर शोकाकुल रहते हैं, शुभ और मांगलिक कार्यों को नहीं करते हैं, ठीक वैसे ही पितृ पक्ष में होता है।
संतान की खुशहाली पर खुश होते हैं पितर
आचार्य लव कुश शास्त्री का कहना है कि श्राद्ध पक्ष को अशुभ मानना उचित नहीं है, क्योंकि श्राद्ध पक्ष गणेश चतुर्थी और नवरात्र के बीच आता है। हमारे समाज में यह बहुत बड़ी भ्रांति या गलतफहमी है कि पितृ पक्ष में शुभ कार्य या खरीदारी नहीं करनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार ऐसा कुछ नहीं हैै। किसी भी शुभ काम की शुरूआत गणेश जी की पूजा से की जाती है। इस आधार पर देखा जाए तो श्राद्ध पक्ष अशुभ नहीं है। श्राद्ध पक्ष में पितृ पृथ्वी पर आते हैं और वह देखते हैं कि उनकी संतान किस स्थिति में हैं। पितर अपनी संतान व वंशज की खुशहाली देखकर खुश होते हैं।
विज्ञापन

नई चीज खरीदने से होता है शुभ
आचार्य आदित्य नारायण अवस्थी का कहना है कि पितृ पक्ष में नई चीज खरीदना शुभ तब नहीं होता है, जब आप नई चीजें खरीदते हैं और उसमें मस्त हो जाते हैं। अपनी खुशियों के साथ पितरों का ध्यान भी करें तो श्राद्ध पक्ष में खरीदारी करने में बुराई नहीं है। नई कार, बाइक, घर, ज्वैलरी, हमारी उन्नति और खुशी को देखकर हमारे पूर्वज भी खुश होंगे और श्राद्ध का असली मकसद पूरा होगा।
अमावस्या को करें श्राद्ध
पंडित हृदय रंजन शर्मा ने कहा कि पितृ पक्ष में दान-धर्म किया जाता है, जो सीधा पितरों को प्राप्त होने की मान्यता है। पितरों तक यह भोजन ब्राह्मणों व पक्षियों के माध्यम से पहुंचता है। जिन व्यक्तियों की तिथि का ज्ञान न हो, उन सभी का श्राद्ध अमावस्या को किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें