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अब अभियान चलाकर जारी होंगे नर्सिंग होम - अस्पतालों के पंजीकरण

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निजी क्षेत्र के चिकित्सकों के नर्सिंग होम - अस्पतालों के पंजीकरण आवेदन व नवीनीकरण की फाइलों से अब धूल हटेगी। लंबे समय से लंबित इन फाइलों के निस्तारण की बुधवार को कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। जिले में 192 ऐसे आवेदन लंबित हैं। दो सप्ताह में इन फाइलों पर निर्णय लिया जाएंगे।
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बुधवार को सीडीओ अंकित खंडेलवाल, अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ.वीके सिंह, सीएमओ डॉ.नीरज त्यागी की मौजूदगी में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मुद्दों पर बैठक हुई। जिसमें सबसे अहम मुद्दा निजी अस्पतालों के पंजीकरण के लंबित होने का था। कोरोना की वजह से अब तक ये आवेदन न तो जारी हो रहे थे और न नवीनीकरण हो पा रहे थे। अब इनसे जुड़े कुछ डॉक्टरों के तबादले भी हो गए। इस पर तय किया गया है कि अगले पंद्रह दिन तक टीमें बनाकर 10-10 आवेदनों की जांच, सत्यापन आदि के काम में लगाई जाएंगी और उनकी रिपोर्ट के आधार पर उनका निस्तारण किया जाएगा। ताकि डॉक्टरों की शिकायतों को दूर किया जा सके।
न बता सके झोलाछापों का ब्योरा, बाबू हटाने के निर्देश
अपर निदेशक स्वास्थ्य के अनुसार इस बैठक में झोलाछापों से जुड़ी शिकायतों पर भी चर्चा हुई। इस दौरान सीएमओ दफ्तर से जुड़े इन शिकायतों को देखने वाले बाबू से सवाल जवाब किए गए। जिनसे पूछा गया कि जिले में कितने झोलाछाप हैं। किस तरह की और कितनी उनसे जुड़ी शिकायतें हैं। कहां उनकी जांच लंबित हैं। कितनों में निर्णय हुआ है। मगर बाबू इस विषय में कोई जवाब नहीं दे सके। इस पर तत्काल बाबू को इस पटल व सीएमओ कार्यालय से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
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