एक के बाद करके कई शिकायतें स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक हुई। उसी के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कासिमपुर स्थित जेके सीमेंट फैक्टरी के खिलाफ प्रदूषण फैलाने का नोटिस जारी करके औपचारिकता निभाई गई। स्थानीय स्तर पर किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आखिर में लोगों ने मुख्यमंत्री से ऑन लाइन पोर्टल पर शिकायत हुई, उसी के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी हरकत में आए।
शुरुआत अगर शहर के उन छोटे कारखानों से करें, जो आबादी क्षेत्र में हैं। उनमें तेजाब व केमिकल का खुल्लम खुल्ला प्रयोग हो रहा है। इसके बाद यह तेजाब व केमिकल नालियों के रास्ते जलस्रोतों में पहुंच रहा है। एक दशक पहले इस वजह से शहर के सासनी गेट इलाका का पानी पीने योग्य नहीं बचा। अधिकांश घरों में या तो वाटर प्यूरीफायर लगे हैं। या घरों में आरओ प्लांट से पीने का पानी खरीदकर मंगाया जाता है। इसके बाद जवां साथा क्षेत्र की ओर गौर करें तो एक दशक से इस इलाके में फ्लाईएश से फसलें बर्बाद हो रही हैं। क्षय रोगियों की संख्या बढ़ रही है। एक दशक में अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है। कई बार आवाज उठी है। धरना प्रदर्शन हुए हैं। मगर एक्शन के नाम पर अब नोटिस देकर खानापूर्ति की जा रही है।
वहीं दूसरी ओर हिंद एग्रो में प्रदूषण व पशु कट्टी के नियमों की अनदेखी कर अवैध कट्टी की जा रही थी। इसकी सूचना जिला पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची। तय हुआ कि एक दिन अचानक छापा मारा जाएगा। इसके लिए टीम को तैयार रहने के लिए कहा गया। टीम में पुलिस प्रशासन के अलावा प्रदूषण नियंत्रण को शामिल रखा गया। मगर जिस दिन छापा मारा। वहां सब कुछ साफ मिला। उस समय सवाल खड़ा हुआ कि सूचना किसने लीक की। बाद में बिना किसी को बताए, एक सप्ताह बाद फिर पुलिस-प्रशासन की टीम छापे को पहुंची और अचानक प्रदूषण नियंत्रण की टीम को बुलाया तो मौके पर अवैध कट्टी पाई गई।
शासन स्तर से लागू हुए पॉलीथिन प्रतिबंध संबंधी कानून पर भी कहीं कोई एक्शन नहीं दिखाई दे रहा। शुरुआत में प्रदूषण नियंत्रण के अधिकारी कहते फिर रहे कि पहले समझाया जाएगा। फिर कार्रवाई होगी। खुदरा बाजार में आज भी पॉलीथिन में वस्तुएं दी जा रही हैं।