अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
आईबी के इनपुट पर धौर्रा इलाके से एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार किए गए पीएफआई समर्थित एसडीपीआई का प्रदेशाध्यक्ष निजामुद्दीन घातक मंसूबों के साथ काम कर रहा था। खास बात ये है कि उसने स्वयं संघ के नागपुर मुख्यालय में 6 माह तक रहकर संघ की कार्यशैली और विचारधारा को समझा।
इसके बाद सरकार व संघ के खिलाफ काम करने के लिए उसे पीएफआई सबसे सटीक संगठन लगा। इसके बाद पीएफआई से जुड़कर संघ व सरकार के खिलाफ स्लीपर सेल तैयार करने में जुटा था। हैरान करने वाली बात यह है कि वह अलीगढ़ में पिछले 20 वर्ष से ठिकाने बदल - बदलकर रह रहा था। मौजूदा मकान में भी 4 वर्ष से बिना किरायेनामा के बसा हुआ था। मगर किसी को उसके मंसूबों या काम की भनक तक नहीं थी। बुधवार को उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
एसटीएफ आगरा यूनिट के इंस्पेक्टर यतेंद्र शर्मा की ओर से मूल रूप से बलरामपुर निवासी निजामुद्दीन पर मुकदमा दर्ज कराया गया। जिसके बाद क्वार्सी पुलिस ने उसे एसटीएफ से हिरासत में ले लिया और बुधवार दोपहर न्यायालय में पेशी के बाद जेल भेजा गया।
जेल में उसे विशेष निगरानी में रखना तय किया है और 10 दिन तक क्वारंटीन बैरक में रखा जाएगा। उसके पास से बरामद 6 मोबाइल फोन, आपत्तिजनक इस्लामिक साहित्य, बैंक दस्तावेज सहित उसकी पहचान संबंधी दस्तावेज, पार्टी के दस्तावेज आदि जब्त कर उन्हें सीज किया गया। बता दें कि निजामुद्दीन को एसटीएफ ने सोमवार आधी रात को गिरफ्तार कर लिया ।
-पीएफआई के सक्रिय सदस्य के रूप में गिरफ्तार किए गए निजामुद्दीन के खिलाफ क्वार्सी थाने में दर्ज मुकदमे की विवेचना थाना पुलिस द्वारा शुरू कर दी गई है। इसके खिलाफ अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे अन्य साक्ष्य संकलित करने का काम किया जा रहा है। उसी आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।- कलानिधि नैथानी, एसएसपी
शाहजमाल से शाहीनबाग तक रची थी साजिश, अब 2024 था लक्ष्य
एजेंसियों से पूछताछ में पीएफआई के सक्रिय सदस्य निजामुद्दीन ने जो खुलासे किए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। सीएए-एनआरसी के विरोधी उपद्रव में वह शहर के शाहजमाल से लेकर दिल्ली के शाहीनबाग तक लोगों को भड़काने में शामिल रहा।
संगठन की प्लानिंग थी कि उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दिल्ली दौरे पर इस विरोध की आड़ में उपद्रव कराया जाए। मगर एजेंसियों को उस समय उनकी मंशा की भनक लगी और पीएफआई के खिलाफ उस समय भी तगड़ी कार्रवाई के चलते उनके मंसूबे धरे रह गए।
वर्तमान में उनका लक्ष्य 2024 में सरकार के विरोध में बड़ा माहौल बना था। खुद निजामुद्दीन ने स्वीकारा है कि वह कई अलग अलग संगठनों में रहकर यहां इसलिए जुड़ा कि वह उसे सबसे मुफीद संगठन संघ व सरकार के खिलाफ लगा। सिमी के सदस्यों से प्रेरित होकर उसने मुस्लिम हितों को लेकर सियासत की शुरुआत की और यहां तक पहुंचा।
वह पिछले कुछ समय से एएमयू में घुसपैंठ की कोशिश कर रहा था। मगर अभी तक विशेष सफलता नहीं मिल सकी थी। निजाम ने स्वीकारा कि वह पूर्वी व पश्चिमी यूपी में गरीब, अनुसूचित, कमजोर, मुस्लिम युवा व सिखों को सरकार व संघ के खिलाफ बरगलाने व स्लीपर सेल के रूप में काम करने के लिए तैयार कर रहा था। उसने इसके लिए 2012 में संघ के नागपुर मुख्यालय में 6 माह तक रहकर पहले वहां की शैली व विचारधारा समझी। यह समझा कि अल्पसंख्यकों के प्रति क्या रणनीति रहती है।
यह रिपोर्ट वहां गुप्त रूप से रहकर तैयार की। वह संघ के मुस्लिम विचार मंच से जुड़कर रहा। वह स्वीकारता है कि जिस समय सिमी प्रतिबंधित हुई। तभी से उसने अल्पसंख्यकों को तैयार करने का मंसूबा पाला। उसे इसके लिए अब आकर पीएफआई सटीक ठिकाना लगा। चूंकि एसडीपीआई को पीएफआई का समर्थन है। इसलिए वह सीधे पीएफआई के बजाय एसडीपीआई से जुड़ा।
उर्दू व अरबी का जानकार निजाम पिछले 20 वर्ष से अलीगढ़ में था। मगर उसने खुद को दिल्ली में रहना प्रचारित कर रखा था। यहां वह अब तक किराये के घर में ही रहता आया। वर्तमान में जिस घर में था। वहां के लोगों को खुद को राजनेता के रूप में प्रचारित कर रखा था। इस इलाके की मदद से लगातार एएमयू में घुसपैंठ की तैयारी थी।
सीएए - एनआरसी विरोध के दौरान यहीं से रहकर उसने जीवनगढ़, जमालपुर व शाहजमाल तक लोग सक्रिय किए। इसमें कुछ एएमयू से जुड़े लोगों की मदद भी ली। शाहीनबाग तक में सक्रिय रहा। यहां हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अपने संगठन को बराबर जानकारी देता रहा। साथ में संगठन से आर्थिक मदद भी लेकर यहां लोगों को तैयार करता रहा। घर में पत्नी व दो बच्चे हैं। एक भाई लखनऊ में रहता है। खुद अक्सर पूरी यूपी के अलावा केरल, गुजरात, दिल्ली आदि राज्यों में भ्रमण करता रहता है।
इलेक्ट्रानिक साक्ष्य मिटाए, भागने की तैयारी में दबोचा
निजामुद्दीन को पीएफआई के खिलाफ लगातार छापेमारी व धरपकड़ के बाद यह अंदेशा हो गया था कि टीम उसके पास कभी भी पहुंच सकती है। क्योंकि जिन व्हाट्सएप ग्रुपों में जुड़ा था, उनसे जुड़े लोगों तक टीम पहुंच चुकी थी।
इसलिए वह सोमवार की रात एक काले रंग के बैग में अपना सामान व कपड़े समेट कर भागने की तैयारी में था। अगर चंद मिनट की देरी टीम को उस तक पहुंचने में हो जाती तो शायद वह निकल जाता। इससे पहले उसने अपने पास के सभी इलेक्ट्रानिक साक्ष्य भी मिटा दिए।
डेटा रिकवरी को लैब भेजे गए मोबाइल
निजाम को जिस समय पकड़ा, वह बैग लेकर घर से निकल रहा था। तभी मुखबिर ने इशारा किया कि यही वह व्यक्ति है। इस पर उसे दबोच लिया गया। उसके पास से छह मोबाइल फोन मिले, जबकि वह 25 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुपों में जुड़ा था। उनका काफी डेटा उसने डिलीट कर रखा था।
साथ में मोबाइल में मौजूद अन्य साक्ष्य भी मिटा रखे थे। कुछ डेटा मौजूद था, जिसमें सरकार व देश विरोधी साक्ष्य मौजूद थे। इन सभी मोबाइलों को फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं। ताकि उनमें से डिलीट किया गया डेटा रिकवर किया जा सके। इसके अलावा उसकी जी-मेल आईडी व अन्य सभी सोशल मीडिया एकाउंटों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
खुद का बैंक खाता सीज, पेटीएम पर कहां से आता था रुपया
पूछताछ में स्वीकारा कि उसका एसबीआई बलरामपुर में खाता है। वह लंबे समय से सीज पड़ा है। इसलिए वह संगठन से अपना वेतन पेटीएम के जरिये लेता था। साथ में अन्य सभी रुपयों के लेनदेन भी पेटीएम से होते थे। अब टीम इस बात की भी जांच कर रही है कि उसे किस नंबर से और कौन यह रकम भेजता था। वह जांच के आधार पर ही सामने आएगा। उसका खाता क्यों सीज पड़ा है और उस पर बलरामपुर में क्या आपराधिक इतिहास है। इसकी भी जांच की जा रही है।
पुलिस से बोली पत्नी, मेरा पति बेगुनाह
मंगलवार रात व बुधवार को थाने पहुंची निजाम की पत्नी नूरजहां ने अपने पति को बेगुनाह बताया है। पुलिस से साफ कहा कि उसे आज तक अपने पति की कोई गतिविधि संदिग्ध नहीं लगी। बेवजह उसे फंसाया जा रहा है। हालांकि पुलिस द्वारा उसे समझाकर वापस भेज दिया।