हाईवे पर आए दिन हो रहे सड़क हादसे के लिए काफी हद तक सड़क की खामियां भी जिम्मेदार हैं। खासकर रात के समय हाईवे का सफर जानलेवा बन रहा है। अलीगढ़ - गाजियाबाद एक्सप्रेस वे पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। यहां फोर एवं सिक्स लेन के निर्माण एवं मरम्मत का काम किया जा रहा है। धीमी गति से चल रहे इस निर्माण कार्य के दौरान निर्माणदायी संस्था वाहन चालकों सुरक्षा का कतई ध्यान नहीं रख रही है। रात में पूरे हाईवे पर अंधेरा ही पसरा रहता है। कहीं-कहीं ही पोलों पर लाइटें जलती देखी जा सकती हैं। ऐसे में यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को बेहद दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
रात में यहां से सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं है। तमाम खामियों को दूर किए बिना ही हाईवे का निर्माण किया जा रहा है। सड़क के दोनों लेन पर दोनों दिशा से वाहन फर्राटे भरते हैं। एक लेन से दूसरे लेन पर डायवर्जन वाले स्थान पर या तो संकेतक बोर्ड नहीं लगे हैं या लगे भी हैं तो उनमें कई तरह की खामियां हैं। ऐसे में इस हाईवे पर जान जोखिम में डालकर लोग सफर करने को विवश हैं। सड़क पर कहीं नाली का काम अधूरा है तो कहीं डिवाइडर का निर्माण भी नहीं हो सका है।
फोरलेन जहां घनी आबादी से होकर गुजरा है, वहां भी कोई संकेतक बोर्ड नहीं लगा हुआ है। हाईवे पर एक तो वाहनों की गति पर कोई नियंत्रण नहीं है, दूसरे सड़क निर्माण में बरती गई खामियों के चलते आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं में लोगों की जान जा रही है। संबंधित विभाग अब तक खतरे वाले स्थानों पर संकेतक भी नहीं लगा सका है। खतरों से अंजान मुसाफिर हाईवे पर आवाजाही कर रहे हैं। रात के वक्त आवाजाही में जोखिम दोगुना बढ़ जा रहा है। हाईवे पर महरावल पुल से लेकर जनपद सीमा के बार्डर तक वाहनों के निकलने के लिए एक ही लेन चालू है। बाकी सड़क को उखाड़ने के साथ ही उसकी मरम्मत एवं नये सिरे से निर्माण कराया जा रहा है। इससे वाहन के ओवरटेक करने अथवा साइड लेने भर तक की जगह नहीं है। ऐसे में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
हाईवे पर सड़क निर्माण के दौरान हरसंभव सुरक्षा के उपाय अपनाए जा रहे हैं। इसके बाद भी यदि कोई खामी है तो उसका निरीक्षण कर व्यवस्था में सुधार कराया जाएगा, ताकि होने वाले हादसों की रोकथाम हो सके।
- प्रमोद कुमार कौशिक, परियोजना प्रबंधक, एनएचआई