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नगर निगम ने तुड़वाए अग्रसेन जयंती के स्वागत द्वार, आक्रोश

सार

नगर निगम अधिकारियों की एक हरकत ने शहर में नए विवाद को जन्म दे दिया है।इसके अलावा प्रशासन से सभी तरह के आयोजन की पूर्व में अनुमति ले ली गई है।मैं स्वयं व शहर विधायक नगर आयुक्त से मिले और कहा गया कि इस तरह महापुरुषों का अपमान करना गलत है।
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श्री अग्रसेन जयंती पर जीटी रोड पर लगाये स्वागत द्वार को जेसीबी तोड़ती नगर निगम की टीम। अमर उजाला - फोटो : CITY OFFICE
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विस्तार
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नगर निगम अधिकारियों की एक हरकत ने शहर में नए विवाद को जन्म दे दिया है। मंगलवार रात अधिकारियों ने अपर नगर आयुक्त की अगुवाई में रात के अंधेरे में अवैध होर्डिंगों की आड़ में अग्रसेन जयंती एवं शोभायात्रा के लिए लगवाए गए स्वागत एवं तोरड़ द्वार तुड़वा दिए।
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आरोप है कि इस दौरान उन पर लगे महाराजा अग्रसेन के चित्र युक्त बैनर भी नाले में फिंकवा दिए गए। सुबह इसकी जानकारी होने पर अग्रवाल समाज के लोग आक्रोशित हो उठे। मुद्दा विधायकों तक पहुंचा तो दोपहर में शहर के विधायक नगर निगम पहुंचे और नगर आयुक्त से मुलाकात कर ऐतराज जताया। हालांकि प्रकरण समझने के बाद नगर आयुक्त ने अधीनस्थ अधिकारियों को हिदायत दी है और आयोजकों को अनुमति लेकर ही द्वार लगवाने की सलाह दी है।
जानबूझकर अंधेरे में रख द्वार गिराने का अंदेशा
नगर आयुक्त अमित आसेरी की नई तैनाती हुई है। उन्हें शहर की परंपराओं व व्यवस्थाओं के विषय में अभी बहुत जानकारी नहीं है। चर्चा है कि रात के अंधेरे में बिना किसी निर्देश के अतिक्रमण व यातायात में बाधक के बहाने ये द्वार गिरा दिए गए। अब ऐसा क्यों और किसके इशारे पर किया गया, यह तो अधिकारियों के स्तर से ही कुछ साफ किया जा सकेगा।
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नगर आयुक्त अमित आसेरी ने खुद स्वीकार किया है कि यह सब संवादहीनता के चलते हुआ है। ऐसा अधिकारियों को नहीं करना चाहिए था। कोल और शहर विधायक दोपहर में मिले थे, उन्हें बताया गया कि नियमानुसार इसकी अनुमति होती है। आयोजक अनुमति लेकर अब इन्हें लगवा सकते हैं।
महाराजा अग्रसेन के अपमान का आरोप, भेजी शिकायतें
अग्रसेन जयंती पर शोभायात्रा का आयोजन श्री अग्रवाल युवा संगठन 36 वर्ष से करता रहा है । इस घटना को लेकर दोपहर में समिति पदाधिकारियों ने प्रेसवार्ता कर नगर निगम अधिकारियों पर महाराजा अग्रसेन के अपमान का आरोप लगाया। साथ में मुख्यमंत्री से लेेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों को शिकायत भेजने की बात कही है।
प्रेसवार्ता में जयंती संयोजक दुर्गेश अग्रवाल, अध्यक्ष अंकित गुप्ता, महामंत्री अभिनव अग्रवाल, शरद बंसल आदि मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि 2 अक्तूबर को प्रस्तावित शोभायात्रा के लिए अग्रसेन चौक पर तैयारियां चल रही हैं। इसके अलावा प्रशासन से सभी तरह के आयोजन की पूर्व में अनुमति ले ली गई है।
प्रतिवर्ष एक ही ठेकेदार द्वारा स्वागत द्वार लगाए जा रहे हैं। बावजूद इसके बीती रात नगर निगम ने स्वागत द्वार तोड़ दिए और उनके बैनरों पर लगे महाराजा अग्रसेन के चित्र आदि नाले में फिंकवा दिए। ये अपमान है। इससे समाज में आक्रोश है। एक तरफ देश व प्रदेश में महापुरुषों के सम्मान में स्वागत द्वार सरकार द्वारा बनवाए जा रहे हैं।
नगर निगम बिना किसी नोटिस या पूर्व सूचना के अचानक अंधेरे में इन्हें गिरवा दे रहा है। अगर अनुमति का कोई नया नियम लगाया गया है तो आयोजकों को सूचना देनी चाहिए थी। एक माह से ये स्वागत द्वार लगे हैं। अब अचानक बिना सूचना के गिराया जाना अधिकारियों की मंशा व नीयत पर सवाल खड़े करता है। इस संबंध में शिकायतें भेजी गई हैं।
-ये स्वागत द्वार नियमानुसार यातायात में बाधक बनने के कारण तोड़े गए थे। इसमें किसी को परेशान करने की नीयत नहीं हैं। बाकी समाज के लोग क्या कह रहे हैं, इसकी जानकारी नहीं है।-अरुण कुमार गुप्त, अपर नगर आयुक्त
-यह विषय हमारे संज्ञान में लाया गया। मैं स्वयं व शहर विधायक नगर आयुक्त से मिले और कहा गया कि इस तरह महापुरुषों का अपमान करना गलत है। बाकी नियम क्या कहते हैं, उन्हें लागू कराया जाए। किसी महापुरुष का अपमान या किसी को ठेस न पहुंचाई जाए।-अनिल पाराशर, विधायक कोल क्षेत्र
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