एएमयू का मौलाना आजाद पुस्तकालय 90 फीसदी डिजिटल हो चुका है। दुर्लभ पांडुलिपि और दुर्लभ पुस्तकों का डिजिटलीकरण हो चुका है। बाकी 10 फीसदी जल्द हो जाएगा।
पुस्तकालय में 14 लाख से ज्यादा किताबें और दुर्लभ पांडुलिपियां हैं। सात मंजिला पुस्तकालय की बुनियाद वर्ष 1877 में वायसराय लॉर्ड लिटन ने मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना के समय रखी थी। लगभग 83 वर्ष बाद 1960 में पुस्तकालय का उद्घाटन प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था। इसका नाम देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के नाम पर मौलाना आजाद पुस्तकालय रखा गया। जिसमें मौलाना आजाद से जुड़ी चीजें भी संरक्षित हैं।
पुस्तकालय अध्यक्ष प्रो. निशात फातिमा ने बताया कि पुस्तकालय में उर्दू, फारसी, संस्कृत और अरबी भाषाओं में दुर्लभ पांडुलिपियों और पुस्तकों का विश्व प्रसिद्ध भंडार है। इस्लाम, हिंदू धर्म आदि पर दुर्लभ और अमूल्य पांडुलिपियां हैं। कुरान की एक प्रति 1400 वर्ष से अधिक पुरानी है। अबुल फैज फैजी द्वारा श्रीमद्भागवत गीता का फारसी अनुवाद है।
प्रो. फातिमा ने कहा कि पुस्तकालय में रोजाना आठ हजार लोगों की आमद-रफ्त होती है। एक साथ दो हजार लोग बैठकर पढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय सुबह आठ बजे से शुरू होकर रात दो बजे तक रहकर छात्र-छात्राएं पढ़ती हैं।