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अलीगढ़: मंदोदरी बोली दिल में बसी है रामायण

Sat, 28 Mar 2020 07:43 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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मंदोदरी की भूमिका में अपराजिता भूषण। - फोटो : AMAR UJALA
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रामायण का संगीत अलीगढ़ के रविंद्र जैन ने दिया था और रावण की पटरानी बनी थी अलीगढ़ की अपराजिता आशीष निगम अलीगढ। रामायण टीवी सीरियल का 33 वर्ष बाद दोबारा प्रसारण होते ही अलीगढ़ से जुड़ी इसकी कई यादें साझा होने लगी हैं। इस धारावाहिक में मंदोदरी की भूमिका से पहचान बनाने वाली भारत भूषण की बेटी अपराजिता भूषण मूल रूप से अलीगढ़ की रहने वाली हैं।

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उन्होंने फोन पर बताया कि पिता के समय से वह फिल्मों और टीवी सीरियलों में अपनी पहचान बनाने का प्रयास कर रही थी । लेकिन 32 वर्ष की उम्र तक उनको इसका कोई मौका नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने रामायण धारावाहिक से अपनी पहचान बनाई । आज भी रामायण उनके दिल में बसी हुई है । उसकी शूटिंग को अभी तक भुला नहीं पाई है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में वह पुणे में रहती हैं और जब उन्होंने अमर उजाला अलीगढ़ के 28 मार्च के डिजिटल अंक में रामायण टीवी सीरियल से संबंधित खबर पड़ी तो उनकी यादें एक बार फिर से ताजा हो गई हैं। रामायण धारावाहिक में मंदोदरी बनी अपराजिता ने बताया कि वर्ष 1987 में इस धारावाहिक की शूटिंग मुंबई से कुछ दूरी पर उमरगांव में होती थी।

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सभी लोग शूटिंग के सेट पर एक साल तक रहे रावण की भूमिका निभा रहे अरविंद द्विवेदी से भी काफी मित्रवत संबंध हुआ था । मंदोदरी की उनकी भूमिका की प्रशंसा बहुत दिनों तक की गई । इस धारावाहिक में काम करने से पहले ही उनके पति की मौत हो चुकी थी और दो बच्चों को पालने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर थी रामायण के बाद उनको कई फिल्मों में भी काम करने का मौका मिला।

जिसमें गोविंदा के साथ फिल्म हत्या के बाद विश्वात्मा , मोहरा सहित कई फिल्में चर्चित रही । अधिकांश फिल्मों में उनको हीरो या हीरोइन की मां की भूमिका निभाने का मौका मिला । अलीगढ़ में उनका आना-जाना होता रहा, लेकिन पिछले कई सालों से वह पुणे में रह रही हैं। उनके पिता भारत भूषण पूर्व से ही फिल्म मैं बहुत ही सक्रिय रहे थे और रामायण के पहले एपिसोड में उनके पिता भारत भूषण ने तुलसीदास की भूमिका निभाई है।

अपराजिता भूषण ने कहा कि वह अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम की प्रशंसक हैं और जब भी अलीगढ़ आएंगी तो वह इस कार्यक्रम में महिलाओं को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगी। गौर हो कि रामायण का यादगार संगीत अलीगढ़ के रविंद्र जैन ने दिया था जिसकी खबर अमर उजाला के 28 मार्च के अंक में प्रकाशित हुई है।
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