अलीगढ़ के बन्नादेवी क्षेत्र से अनुसूचित किशोरी को अगवा कर दुष्कर्म के मुकदमे में दोषी करार मुख्य आरोपी को उम्रकैद व सहयोगी को भी सजा सुनाई गई है। खास बात है कि यह फैसला मिशन शक्ति अभियान के तहत एडीजे विशेष पॉक्सो सुरेंद्र मोहन सहाय की अदालत ने मात्र 11 अदालती तारीखों में सुनाया है। दोषी करार दिए गए दोनों युवक अमरोहा के रहने वाले हैं।
अभियोजन पक्ष से विशेष लोक अभियोजक महेश सिंह के अनुसार घटना 3 अगस्त 2022 की तड़के पांच बजे की है। बन्नादेवी क्षेत्र के वादी मुकदमा की 16 वर्ष की किशोरी बेटी अचानक घर से गायब हो गई। काफी तलाश के बाद जब वह नहीं मिली तो वादी ने मुकदमा दर्ज कराया। मामले में विवेचक ने 3 सितंबर को किशोरी को सारसौल बस स्टैंड के पास से बरामद कर साथ में ही आरोपी को गिरफ्तार किया।
किशोरी के बयान व विवेचना में उजागर हुआ कि अमरोहा के गजरौला क्षेत्र के गांव कांकाठेर का कौशिंद्र अपने ही गांव के अपने सहयोगी मुकेश संग घटना वाली सुबह किशोरी को अगवा कर ले गया था। दोनों उसे पानीपत लेकर पहुंचे। जहां उसके साथ कौशिंद्र ने लगातार एक माह तक दुष्कर्म किया और मुकेश उसकी निगरानी व सहयोग करता था। 3 सितंबर को आरोपी कौशिंद्र उसे वापस लेकर सारसौल बस स्टैंड आया। जहां पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया।
इस आधार पर दोनों आरोपियों की गिरफ्तार के बाद चार्जशीट दायर की गई। मामले में सत्र परीक्षण के दौरान कौशिंद्र को पॉक्सो-दुष्कर्म व मुकेश को सहयोग का दोषी करार दिया गया। इस आधार पर कौशिंद्र को उम्रकैद व 32 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। वहीं मुकेश को 7 वर्ष व 3 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। दोनों की जुर्माना राशि में से 20 हजार रुपये पीडि़त पक्ष को देने के आदेश दिए हैं।
ये थे किशोरी के बयान
एडीजीसी के अनुसार किशोरी ने अदालत में अपने बयान में कहा कि वह आरोपियों को पहले से नहीं जानती। वह घर से दुकान कुछ सामान लेने गई थी। तभी दोनों उसे जबरन मुंह दबाकर अगवा कर ले गए और जान से मारने की धमकी दी। पानीपत ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इधर, विवेचना में उजागर हुआ कि दोनों दोषी यहां बन्नादेवी क्षेत्र में किराये पर रहते थे। इसी दौरान उन्होंने घटना को अंजाम दिया।
11 तारीखों पर हुआ मुकदमा निस्तारित
एडीजीसी के अनुसार इस मुकदमे में चार्जशीट के आधार पर 16 दिसंबर को आरोप तय किए गए। 19 दिसंबर को पहली गवाही वादी मुकदमा की हुई। दूसरी गवाही 20 दिसंबर को पीड़ित की हुई। तीसरी गवाही विवेचक एसआई रामेश्वर दयाल की 23 दिसंबर को हुई। फिर 2 जनवरी को मुकदमा लेखक सिपाही मानपाल की, 3 जनवरी को विवेचक सीओ शिवप्रताप सिंह की, 5 जनवरी को छात्रा की जन्मतिथि सत्यापित करने वाले बाबू लाल जैन इंटर कॉलेज के लिपिक दीपक जैन की, 13 जनवरी को मेडिकल परीक्षण करने वाली डा.अमीना फारुखी की गवाही हुई। 30 जनवरी को डीएनए व फॉरेंसिक रिपोर्ट आई। इसके लिए विलंब होने पर थाना प्रभारी को पत्र भी लिखा गया था। उसी दिन आरोपियों के बयान हुए। एक फरवरी को बहस हुई और 10 फरवरी को सजा सुनाई गई।