पालीमुकीमपुर क्षेत्र के गांव सालारपुर में सात वर्ष पूर्व विवाहिता की दहेज के लिए जिंदा जलाकर हत्या के मुकदमे में पति-सास सहित तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ में देवर को भी उत्पीड़न का दोषी मानकर सजा सुनाई गई है। यह फैसला एडीजे प्रथम मनोज कुमार अग्रवाल की अदालत से सुनाया गया है। खास बात है कि मुकदमे में मृत्यु पूर्व बयान व घटना के समय चार वर्ष के बेटे की गवाही सजा का आधार बनी है।
अभियोजन अधिवक्ता एडीजीसी अमर सिंह तोमर के अनुसार घटना 4 अप्रैल 2015 की है। वादी मुकदमा नगला मोती कासगंज के नत्थू सिंह के अनुसार उन्होंने अपनी बेटी साधना की शादी 10 वर्ष पूर्व सालारपुर पालीमुकीमपुर के अशोक सिंह संग की थी। 5 अप्रैल को पाली थाने में दर्ज मुकदमे में आरोप लगाया कि बेटी को शादी के बाद से ही दहेज में बाइक व एक लाख रुपये के लिए तंग किया जाता था।
इसी क्रम में घटना वाले दिन उसे केरोसिन डालकर जलाया गया। बाद में क्वार्सी के नर्सिंग होम में उसकी मौत हो गई। इस मुकदमे में पति अशोक के अलावा ससुर मुन्नालाल, सास सावित्री, रिश्ते के ससुर हरिपाल, देवर नवीन को नामजद किया गया। पुलिस ने सभी के खिलाफ चार्जशीट दायर की। दौरान-ए-सत्र परीक्षण ससुर की मौत हो गई।
साक्ष्यों व गवाही के आधार पर अदालत ने प्रकरण में हत्या के लिए पति, सास व रिश्ते के ससुर को दोषी मानते हुए उम्रकैद व 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। पति व सास पर 5-5 हजार रुपये जुर्माना अतिरिक्त है। वहीं उत्पीड़न में सहयोग के दोषी देवर नवीन को दो वर्ष व 5 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया है। जुर्माना राशि में से 30 हजार रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे।
ये दी बेटे ने गवाही
घटना के समय 4 वर्ष व गवाही देने के समय 9 वर्ष का बेटा आर्यन अदालत में गवाही देने आया। उसने स्वीकारा कि मम्मी को पापा ने केरोसिन डालकर जलाया था। सगे बाबा मुन्नलाल ने बचाने की कोशिश की थी। दूसरे बाबा ने उकसाया था, जबकि दादी सब कुछ खड़ी देखती रही थीं। घटना से कुछ समय पहले ही हम लोग मोदी नगर से गांव रहने आए थे। चाचा मोदी नगर में रहते थे। बता दें कि मृत महिला साधना के दो बच्चों में बड़ी बेटी है। दोनों बच्चे घटना के बाद से नाना के पास रहते हैं।