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साढ़े सात हजार रुपये के लिए अगवा कर मार डाला अधिवक्ता के मुंशी को

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आरोपी नरेश - फोटो : CITY OFFICE
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क्वार्सी क्षेत्र के बेगमबाग से अधिवक्ता के लापता मुंशी गोंडा के सजायाफ्ता हिस्ट्रीशीटर मुन्नालाल की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई। शव जवां क्षेत्र की गंग नहर में फेंका गया था। खास बात यह है कि इस हत्या को खैर क्षेत्र के दो अपराधियों ने महज साढ़े सात हजार रुपये के विवाद में अंजाम दिया था। हालांकि, अपराधी दो दिन पहले ही गिरफ्तार कर लिए गए थे। उनसे पूछताछ के बाद हत्या करना उजागर हुआ था, मगर शव नहीं मिला था। सोमवार को पुराने शवों के फोटो में से एक फोटो की पहचान मुंशी के बेटे ने अपने पिता के रूप में कर ली। अब पुलिस इस अपहरण को हत्या में तरमीम कर रही है।
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मूल रूप से गोंडा भैमती निवासी 50 वर्षीय मुन्नालाल शर्मा करीब आठ वर्ष से बेगमबाग में बेटी कनिष्का व बेटा कुनाल संग किराये के मकान में रहते थे। वह दीवानी में एक अधिवक्ता के मुंशी थे। बेटा पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी नोएडा में नौकरी करती है। बेटे ने 12 अगस्त की शाम को क्वार्सी थाना पुलिस को यह तहरीर देकर गुमशुदगी दर्ज कराई कि वह पांच अगस्त को परिक्रमा लगाने मथुरा अपने ताऊ के पास गया था। पिता घर पर थे। छह अगस्त की सुबह उसने पिता को मोबाइल पर फोन किया तो संपर्क नहीं हुआ। इसके बाद से पिता गायब हैं। पुलिस ने 23 अगस्त को गुमशुदगी अपहरण में तरमीम कर गंभीरता से जांच शुरू की तो मोबाइल सर्विलांस की मदद से खैर बिहारीपुर के सुशील व नरेश नाम के दो अपराधी रडार पर आए। उनकी लोकेशन आखिरी समय में मुन्नालाल के साथ थी।
सीओ तृतीय श्वेताभ पांडेय के अनुसार, सुशील व नरेश को हिरासत में लिया गया तो शुरुआत में वे टरकाते रहे। सख्ती से पूछताछ में सुशील ने स्वीकार किया कि वर्ष 2013/14 में वह और उसका भाई एक हत्या के आरोप में जेल में गए थे। मुन्नालाल पहले से एक हत्या के आरोप में जेल में थे। वहां उनकी मुलाकात हुई। कुछ समय बाद मुन्नालाल जमानत पर छूट गए और सुशील भी छूट गया, मगर सुशील का भाई नहीं छूटा। इस पर सुशील ने मुन्नालाल से दोस्ती में अपने भाई की जमानत कराने के लिए कहा। चूंकि, मुन्नालाल अधिवक्ता के मुंशी थे। उन्हें साढ़े सात हजार रुपये भी दिए गए। इसके बाद आज तक न तो उसके भाई की जमानत हुई और न ही रुपये वापस मिले।
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छह अगस्त की दोपहर उसने मुन्नालाल को खेरेश्वर चौराहे पर खाने-पीने के इरादे से बुलाया। यहां से वह मुन्नालाल को नरेश के साथ किसी काम का बहाना बनाकर बिहारीपुरी खैर ले गया, जहां तीनों ने बीयर व शराब पी। इसी दौरान साढ़े सात हजार रुपये का जिक्र सुशील ने छेड़ा तो मुन्नालाल अभद्रता पर उतर आए और नरेश के थप्पड़ जड़ दिया। इसी गुस्से में सुशील ने मुन्ना की गला दबाकर हत्या कर दी। शव न मिलने पर पुलिस ने दोनों को अपहरण में जेल भेज दिया था।
गंगा में फेंकना था शव, नहर में फेंका
सीओ के अनुसार, दोनों ने बताया कि हत्या के बाद पहले तो शव बिहारीपुर में बंबे में ही ठिकाने लगाने की योजना बनाई। मगर पकड़े जाने के डर से गंगा में फेंकने के इरादे से रात को शव ऑटो में रखकर अनूपशहर के लिए चल दिए। जवां क्षेत्र में सीएनजी खत्म होने पर ऑटो बंद हो गया। इस पर शव वहीं जवां की गंग नहर में फेंक दिया। इसके बाद शव दस दिन पहले अकराबाद क्षेत्र में लावारिस अवस्था में बरामद हुआ, जिसे अकराबाद पुलिस ने 72 घंटे तक शिनाख्त न होने पर अज्ञात में अंतिम संस्कार करा दिया।
सजा के बाद हाईकोर्ट से मिली थी अपील जमानत
गोंडा थाने पर हिस्ट्रीशीटर नंबर 180 पर दर्ज मुन्नालाल के खिलाफ चार मुकदमे दर्ज हैं। जिनमें 2006 में मारपीट, 2007 में मिनी गुंडा, 2012 में अपहरण के बाद हत्या, 2013 में धमकी का मुकदमा दर्ज है। बिट्टू की हत्या के मुकदमे में इसे 30 अक्तूबर 2013 को उम्रकैद की सजा हुई और 2014 में हाईकोर्ट से अपील जमानत पर रिहा हो गया था।
- क्वार्सी से जुड़े अपहरण के मामले में हत्या का खुलासा हुआ है। अपहरण के दोनों आरोपी जेल भेज दिए गए हैं। पुराने शवों के फोटो की पहचान के दौरान बच्चों ने मुन्नालाल का शव पहचाना है। मुकदमे में हत्या की धाराएं बढ़ाकर आगे कार्रवाई की जा रही है। जो शव मिला है, उसका डीएनए सैंपल बच्चों से मिलान कराया जाएगा।
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- कलानिधि नैथानी, एसएसपी

आरोपी सुशील- फोटो : CITY OFFICE

मुन्ना लाल का फाइल फोटो- फोटो : CITY OFFICE

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